स्वर्ण की हैट्रिक से चूके नीरज, पर हौसला है बुलंद: चोट के दर्द और संघर्ष की अनकही कहानी
भारत के ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा के लिए एशियाई खेलों से बाहर होना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक स्वर्ण और पेरिस में रजत पदक की चमक बिखेरने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ तो बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस कड़वे सच को ‘स्वीकार’ कर जल्द वापसी पर ध्यान देना ही अब उनकी प्राथमिकता है। 28 वर्षीय चोपड़ा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक लगाने की दहलीज पर थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
ट्रेनिंग के दौरान लगी ‘लिगामेंट’ की चोट ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। यह चोट लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने के ठीक बाद लगी। इस इंजरी के कारण न केवल उनका 2026 सत्र समय से पहले समाप्त हो गया, बल्कि वह एशियाई खेलों और डायमंड लीग फाइनल की रेस से भी बाहर हो गए।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के ‘खेलो भारत पॉडकास्ट’ में अपने दिल का हाल बयां करते हुए नीरज ने कहा, “निश्चित रूप से यह मुश्किल है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह आसान है, लेकिन मेरे करियर में ऐसी परिस्थितियां कई बार आई हैं, इसलिए अब यह थोड़ा सामान्य लगने लगा है। कई बार ऐसा हुआ जब मैं पूरी तरह तैयार था और अचानक चोट ने सब रोक दिया।”
नीरज की निराशा इस बार इसलिए भी गहरी थी क्योंकि उन्हें महसूस होने लगा था कि वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में लौट आए हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, “जब मुझे लगा कि मैं आखिरकार पुराने नीरज की तरह हो गया हूं, वही उत्साह और निरंतरता वापस आ गई है और तभी मैंने 88 मीटर का थ्रो किया। लेकिन उसके अगले ही दिन ट्रेनिंग में दोबारा चोट लग गई। शुरुआती कुछ मिनटों तक तो मुझे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है।”
अपनी मेहनत और त्याग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “मैंने खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह झोंक दिया था। साल की शुरुआत से ही मैं ट्रेनिंग में जुटा था और परिवार के साथ बिल्कुल भी समय नहीं बिताया। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर था। बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी मैं फिर से वहीं पहुंच गया हूं, जहां साल के शुरू में था।”
एशियाई खेलों में हिस्सा ले रहे भारतीय दल के लिए नीरज ने एक प्रेरणादायक संदेश भी साझा किया। उन्होंने खिलाड़ियों को इस मौके को पूरी तरह भुनाने की सलाह देते हुए कहा, “अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। एशियाई खेलों जैसा मंच चार साल में एक बार मिलता है, इसलिए मैदान से इस मलाल के साथ वापस न लौटें कि ‘मैं कुछ और कर सकता था’।”
उन्होंने आगे कहा, “अगले चार साल का इंतजार करने के बजाय खुद को मानसिक रूप से मजबूत करें और अपना शत-प्रतिशत दें। आपको यह संतुष्टि होनी चाहिए कि आपने अपनी मेहनत के लिए अपना सब कुछ लगा दिया।” नीरज ने अंत में सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि भारतीय दल शानदार प्रदर्शन करेगा और हर एथलीट अपने तय लक्ष्य को हासिल करेगा।
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