इंदौर में 19 सितंबर को राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की पुलिस उपायुक्त नरेंद्र रावत पर की गई टिप्पणी पर IPS एसोसिएशन ने आपत्ति जताते हुए जनप्रतिनिधियों से लोक सेवकों के प्रति संयमित भाषा और आचरण की अपेक्षा की है।
भीड़ नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ विवाद
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम 19 सितंबर को इंदौर के रीजनल पार्क के पास आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शिक्षा, भर्ती, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर छात्रों से संवाद हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए कई व्यवस्थाएं लागू की थीं।
इसी दौरान भीड़ नियंत्रण को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने पुलिस उपायुक्त नरेंद्र रावत पर टिप्पणी की। मीडिया से बातचीत में वर्मा ने अधिकारी को ‘सिंघम’ बताते हुए कहा कि वह राहुल गांधी की टीम से बहस कर रहे थे और मंच पर लोगों की संख्या को लेकर सवाल कर रहे थे।
IPS एसोसिएशन ने जारी किया वक्तव्य
सज्जन सिंह वर्मा की टिप्पणी पर IPS एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने अपने वक्तव्य में इस तरह की टिप्पणी की भर्त्सना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों से लोक सेवकों के प्रति मर्यादित और संयमित आचरण बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
एसोसिएशन के अनुसार, कार्यक्रम में मंच प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी नगरीय पुलिस इंदौर के पुलिस उपायुक्त नरेंद्र रावत को सौंपी गई थी।
पुलिस के मुताबिक रावत निभा रहे थे जिम्मेदारी
IPS एसोसिएशन के बयान के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ के कारण व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में रावत कार्यक्रम से पहले जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार भीड़ को व्यवस्थित करने और सुरक्षा व्यवस्था संभालने का काम कर रहे थे।
एसोसिएशन ने कहा कि इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी को लेकर मीडिया में ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन्हें उसने अशोभनीय, आपत्तिजनक और अपमानजनक माना।
कार्यक्रम के लिए पुलिस ने तय की थीं कई सुरक्षा शर्तें
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से पहले स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से संबंधित 31 शर्तें तय की थीं। इनमें प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा से जुड़े निर्देश शामिल थे। पुलिस ने इन उपायों को राहुल गांधी की सुरक्षा और कार्यक्रम के सुचारू संचालन से जोड़ा था।
कार्यक्रम स्थल को लेकर भी पहले विवाद हुआ था। कांग्रेस ने शुरुआत में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद रीजनल पार्क के सामने की जमीन पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
राजनीतिक कार्यक्रम में पुलिस की भूमिका पर बहस
इस पूरे विवाद में एक तरफ कांग्रेस नेता की पुलिस अधिकारी को लेकर की गई टिप्पणी है, वहीं दूसरी तरफ IPS एसोसिएशन का पक्ष है कि अधिकारी कार्यक्रम में अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी निभा रहे थे।
सज्जन सिंह वर्मा की टिप्पणी और IPS एसोसिएशन की प्रतिक्रिया दोनों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह विवाद मुख्य रूप से भीड़ प्रबंधन, पुलिस की ड्यूटी और जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर है।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में क्या हुआ था?
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया गया। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र और मध्य प्रदेश की शिक्षा एवं रोजगार व्यवस्था पर भी राजनीतिक टिप्पणियां कीं।
कार्यक्रम के बाद अब पुलिस अधिकारी को लेकर की गई टिप्पणी पर IPS एसोसिएशन की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक विवाद में एक नया पहलू जोड़ दिया है।
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