पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर बहस तेज है। पूर्व विशेष मुख्य सचिव KBS सिद्धू ने दावा किया है कि मौजूदा मतदाता का नाम उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची से मैप करना कानून में निर्धारित अनिवार्य शर्त नहीं है। उन्होंने पात्र लोगों से नाम जुड़वाने के लिए Form-6 का इस्तेमाल करने की अपील की है।
20.66 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर
पंजाब में SIR के तहत 13 अगस्त को सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। आधिकारिक प्रक्रिया के मुताबिक 13 अगस्त से 12 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया था।
ड्राफ्ट सूची से करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम बाहर रह गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें 9,44,131 स्थायी रूप से स्थानांतरित, 5,74,568 मृत, 4,12,715 अनुपस्थित/अप्राप्य और 1,19,145 डुप्लीकेट प्रविष्टियां बताई गईं।
सिद्धू ने ऐसे लोगों से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए नया Form-6 भरने की अपील की है।
2002-03 की सूची से मैपिंग पर सवाल
KBS सिद्धू का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में मौजूद हैं, लेकिन उन्हें नोटिस मिले हैं, उनकी ओर से जरूरी नहीं कि कोई गलती हुई हो। उनके अनुसार विवाद उस प्रक्रिया से पैदा हो रहा है जिसमें मौजूदा मतदाता की प्रविष्टि को उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची की प्रविष्टि से जोड़ा जा रहा है।
सिद्धू ने इसे एक अतिरिक्त प्रशासनिक शर्त बताते हुए कहा कि केवल सॉफ्टवेयर आधारित मिलान में किसी व्यक्ति की प्रविष्टि नहीं मिलने से उसके मतदाता अधिकार पर सवाल नहीं उठना चाहिए।
यह सिद्धू की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर व्याख्या है; इसे निर्वाचन आयोग के आधिकारिक नियम के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
मतदाता बनने के लिए तीन मुख्य पात्रता शर्तों का हवाला
सिद्धू ने संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए मुख्य रूप से भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष की आयु पूरी करना और संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कानून में निर्धारित अयोग्यताओं के अलावा प्रशासनिक निर्देश के जरिए कोई अतिरिक्त पात्रता शर्त नहीं जोड़ी जानी चाहिए।
उनके अनुसार मतदाता के रूप में पंजीकरण किसी प्राधिकरण की ओर से दी जाने वाली रियायत नहीं है, बल्कि कानून में निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले व्यक्ति का वैधानिक अधिकार है।
Form-6 को लेकर क्या है व्यवस्था?
पंजाब के ड्राफ्ट रोल जारी होने के समय मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी Form-6 को नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित फॉर्म बताया था। Form-6 के अलावा NRI मतदाताओं के लिए Form-6A, नाम हटाने के लिए Form-7 और सुधार या स्थानांतरण के लिए Form-8 की व्यवस्था बताई गई थी।
सिद्धू ने निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने की अपील की है कि SIR की दावे-आपत्ति अवधि निकल जाने के बाद भी पात्र नागरिक सामान्य प्रक्रिया के तहत Form-6 दाखिल कर सकें।
उन्होंने कहा कि केवल पुनरीक्षण की समयसीमा चूक जाने के कारण किसी पात्र नागरिक को सिर्फ अपील की जटिल प्रक्रिया तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है
पंजाब में SIR का कार्यक्रम निर्वाचन आयोग की ओर से संशोधित किया गया था। आयोग के अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त को प्रकाशित हुई और अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
पंजाब के CEO कार्यालय के अनुसार दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 8 अक्टूबर तक चलनी है।
इसलिए फिलहाल ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें बदलाव संभव है।
राजनीतिक दलों से पात्र मतदाताओं को जोड़ने की अपील
सिद्धू ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक दलों से अपील की कि वे केवल नाम हटाए जाने का विरोध करने तक सीमित न रहें, बल्कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने पर भी ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में शामिल हर पात्र नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे वह भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल को वोट दे।
KBS सिद्धू 1984 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। उन्होंने पंजाब सरकार में विशेष मुख्य सचिव के रूप में काम किया है और चुनावी प्रक्रिया में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


