देवघर के तीर्थपुरोहितों का पवित्र संकल्प: गोमुख से बाबाधाम तक की अदम्य कांवड़ यात्रा
देवघर: आस्था और भक्ति की अनूठी मिसाल पेश करते हुए, देवघर के तीर्थपुरोहितों का पहला जत्था शुक्रवार को गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ के लिए कांवर यात्रा पर निकल पड़ा। “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो” के नारों के साथ, छह सदस्यों के इस दल ने अपनी 1800 किलोमीटर लंबी यात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा के पहले दिन, उन्होंने भैरो घाटी में विश्राम किया, और अब हरिद्वार, मुरादाबाद, बनारस और गयाजी जैसे पवित्र स्थलों से होते हुए, वे जनवरी के प्रथम सप्ताह में बाबाधाम पहुंचेंगे।
यह केवल एक जत्था नहीं, बल्कि आस्था का एक महासागर है जो देवघर से उठकर चला है। रविवार को तीर्थपुरोहितों का दूसरा जत्था, जिसमें 13 श्रद्धालु और तीन सेवक शामिल हैं, अपनी कांवर यात्रा शुरू करेगा। वहीं, सोमवार को तीसरा जत्था, जिसमें 11 श्रद्धालु और तीन सेवक हैं, इसी पवित्र अनुष्ठान में शामिल होगा।
तीर्थपुरोहित सिद्धार्थ कश्यप ने बताया कि प्रशासन द्वारा मौसम खराब होने के कारण गोमुख-गंगोत्री जाने पर प्रतिबंध के बावजूद, देवघर के तीनों जत्थों ने गोमुख से गंगाजल लेकर ही अपनी यात्रा का निर्णय लिया है। यह दृढ़ संकल्प उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है।
पहले जत्थे में शामिल हैं: श्रवण मिश्र, अभिषेक मिश्र, विजय पंडित, अजय झा, गौरव खवाड़े और सागर शृंगारी।
दूसरे जत्थे में हैं: विनोद दत्त द्वारी, नागेश्वर राज जजवाड़े, अनिल श्रृंगारी, उदय राज जजवाड़े, खीरा श्रृंगारी, राम लाल मिश्र, दिलीप राम मिश्र, त्रिलोकी नाथ पांडेय, बबलू राज जजवाड़े, दिवाकर मिश्र, अनंत खवाड़े, राजू मठपति, राजेश मिश्र और सेवक गोवर्द्धन, दुखु व सुखु।
तीसरे जत्थे में शामिल हैं: रोहित चरण मिश्र, राजू झा, बाबूमणि परिहस्त नंदू नरौने, रवि शांडिल्य, विक्की जजवाड़े, पिंटू, सुमन झा, दीपक मिश्र, सुमित आनंद, बालाजी खवाड़े व सेवक के रूप में रूपेश, पिनाकी और शिबू।
यह यात्रा न केवल 1800 किलोमीटर की दूरी तय करने की शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह उन तीर्थपुरोहितों की अगाध भक्ति और निष्ठा का प्रमाण है जो बाबा बैद्यनाथ को प्रसन्न करने के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
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