एच1बी वीज़ा शुल्क में 1 लाख डॉलर का नया नियम: क्या है पूरा सच?
हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक घोषणापत्र ने दुनिया भर में, खासकर भारत में, एच1बी वीज़ा धारकों के बीच हलचल मचा दी है। इस घोषणा के अनुसार, एच1बी वीज़ा शुल्क को सालाना 1,00,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का प्रावधान है। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह भारी-भरकम शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होगा।
क्या है इस नए नियम का मतलब?
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारी ने बताया कि यदि यह शुल्क लागू होता है, तो कुशल अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों को हर साल 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा, लेकिन यह केवल उन कर्मचारियों के लिए होगा जो नए आवेदन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जो लोग पहले से ही एच1बी वीज़ा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं, या जो मौजूदा वीज़ा धारक अमेरिका से बाहर हैं, उन पर इस नए शुल्क का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय पेशेवरों पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला भारत में काम करने वाले पेशेवर, खासकर आईटी क्षेत्र में, के लिए चिंता का विषय है। फिलहाल, एच-1बी वीज़ा शुल्क नियोक्ता के आकार और अन्य लागतों के आधार पर लगभग 2,000 से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक है। यह वीज़ा तीन साल के लिए वैध होता है और इसे और तीन साल के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है।
ट्रंप के इस कदम से भारतीय पेशेवरों में दहशत, भ्रम और चिंता की स्थिति देखी जा रही है। कई भारतीयों ने अपनी भारत यात्रा की योजना रद्द कर दी है, जबकि भारत में मौजूद लोग स्पष्टता के अभाव में वापस लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आव्रजन मामलों के वकील और विभिन्न कंपनियां अमेरिका से बाहर यात्रा पर गए एच1बी वीज़ा धारकों को तुरंत वापस लौटने की सलाह दे रही हैं, ताकि वे इस नए नियम से प्रभावित न हों।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया नियम किस प्रकार लागू होता है और इसका भविष्य में क्या प्रभाव पड़ता है।
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