विश्व हलचल: यमन में फिर भड़की युद्ध की आग, तो तुर्की ने बढ़ाया शांति का ऐतिहासिक कदम
यमन के रणक्षेत्र में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। यमन की सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को और तेज़ कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि देश एक बार फिर विनाशकारी और व्यापक संघर्ष की कगार पर खड़ा है। इस बीच, तुर्की से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहाँ कुर्द शांति प्रयासों को गति देने वाला एक विधेयक संसद के पहले चरण में मंज़ूर हो गया है। इस ऐतिहासिक विधेयक में कुर्द उग्रवादियों के हथियार डालने और पूर्व लड़ाकों के पुनर्वास के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं।
यमन की सेना का कहना है कि यह आक्रामक रुख देश के मध्य और पूर्वी इलाकों में हूतियों द्वारा किए गए हालिया हमलों का करारा जवाब है। सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नाज़िली ने जानकारी दी कि इन हमलों में विद्रोहियों के रणनीतिक ठिकानों और उनकी सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन कार्रवाइयों का एकमात्र मकसद सेना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना था।
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ताजा सैन्य कार्रवाई 2022 के उस युद्धविराम समझौते के बाद उपजे तनाव में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है, जिसने लंबे समय तक भीषण जंग को थामे रखा था। यमन का गृह युद्ध असल में ईरान समर्थित हूतियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन (जो अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का सहयोगी है) के बीच की एक जटिल लड़ाई है। संयुक्त राष्ट्र के दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से संयम बरतने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने आगाह किया कि अप्रैल 2022 की मध्यस्थता के बाद अब यमन में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा सबसे अधिक हो गया है।
वहीं दूसरी ओर, तुर्की में शनिवार को एक संसदीय समिति ने उस कानून के मसौदे को हरी झंडी दे दी, जिसमें हज़ारों पूर्व लड़ाकों के लिए ‘सशर्त माफ़ी’ का प्रावधान शामिल है। उम्मीद है कि अगले हफ्ते की शुरुआत में आम सभा में इस पर बहस होगी और इसे अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) ने दशकों पुराने संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से हथियार छोड़ने और अपना संगठन भंग करने की घोषणा की थी।
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यह नया कानून पीकेके सदस्यों के पुनर्वास और उनकी जेल की सजाओं में रियायत या मुकदमों में देरी की प्रक्रिया को वैधानिक रूप देगा। हालांकि, ये उपाय तभी प्रभावी होंगे जब तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस बात की पुष्टि कर देगी कि संगठन पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसने सारे हथियार सौंप दिए हैं। 1980 के दशक से जारी इस रक्तरंजित संघर्ष में अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और इसका असर इराक व सीरिया जैसे पड़ोसी देशों तक फैल चुका है। फिलहाल, ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि यमन में जहां तनाव की लपटें फिर से उठ रही हैं, वहीं तुर्की शांति की एक नई राह खोजने की कोशिश में जुटा है।
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