INDIA NEWS(Aware media): MLC चुनाव का संदेश इस बार राजनीतिक दलों के लिए साफ नजर आ रहा है कि जब पार्टी के नेता आपस में ही लड़ने लगते हैं तो इसका फायदा विरोधियों को मिल जाता है। वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने अपने ब्लॉग में उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार महाराष्ट्र और कर्नाटक तक के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए बताया है कि कई जगह पार्टियों की अंदरूनी लड़ाई ने उनके प्रदर्शन पर असर डाला।
उत्तर प्रदेश की बात करें तो विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने अपनी छह सीटें बरकरार रखीं जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत हासिल की। रजत शर्मा का कहना है कि इन नतीजों को लेकर दोनों दल अपनी अपनी तरह से दावे कर रहे हैं। बीजेपी की जीत को हेराफेरी बताने और सपा की जीत को बड़ी लोकप्रियता से जोड़ने के बजाय चुनाव की असली स्थिति को समझना चाहिए। विधान परिषद चुनाव में मतदाताओं का आधार सीमित होता है इसलिए इसे पूरे प्रदेश का राजनीतिक मूड मानना सही नहीं होगा।
बिहार में भी कई दलों को आपसी खींचतान का नुकसान उठाना पड़ा। ब्लॉग के मुताबिक जेडीयू के नेताओं की आपसी लड़ाई से आरजेडी को फायदा मिला। वहीं आरजेडी और कांग्रेस के बीच टकराव का लाभ बीजेपी और जेडीयू को हुआ। कुछ जगहों पर जनसुराज पार्टी भी इस राजनीतिक खींचतान का फायदा उठाने में सफल रही।
महाराष्ट्र में भी अंदरूनी लड़ाई का असर देखने को मिला। अजित पवार के निधन के बाद उनकी पार्टी में कई गुट और प्रभावशाली केंद्र बनने की बात कही गई है। इसका फायदा शरद पवार को मिला और उनके दोनों उम्मीदवार जीत गए। वहीं महायुति के सहयोगी दलों के बीच आपसी मुकाबले से बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा।
कर्नाटक में कांग्रेस चार में से तीन सीटें जीतने में सफल रही लेकिन एक सीट हारने के बाद पार्टी के अंदर नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच भी बयानबाजी देखने को मिली।
रजत शर्मा के इस विश्लेषण का मुख्य संदेश यही है कि चुनाव में केवल विरोधियों से मुकाबला करना काफी नहीं है। पार्टी के भीतर एकजुटता भी जरूरी है। नेता आपस में ही एक दूसरे को कमजोर करने में लग जाएंगे तो इसका फायदा दूसरी पार्टियां जरूर उठाएंगी।
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