10 अक्टूबर को CJP Protest की अनुमति क्यों नहीं दी? दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने SC में बताया पूरा कारण

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
5 Min Read

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पुलिस का पक्ष रखा है। पुलिस ने कहा है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था, आम लोगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था।

जुलाई के प्रदर्शन को बनाया मुख्य आधार

दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हुए CJP के कथित ‘चलो संसद’ मार्च का हवाला दिया। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन बिना अनुमति हुआ था और इस दौरान कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमले, गैरकानूनी जमावड़े और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं हुईं।

पुलिस ने दावा किया कि जुलाई के प्रदर्शन में 240 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए थे। अपने दावे के समर्थन में पुलिस ने तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री का भी हवाला दिया है।

जून के आश्वासन का भी जिक्र

पुलिस के मुताबिक, जून में CJP की ओर से प्रदर्शन को लेकर लिखित आश्वासन दिया गया था। इसमें प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने और 1,000 से ज्यादा लोगों के शामिल नहीं होने की बात कही गई थी।

पुलिस का दावा है कि संसद की ओर बिना पूर्व अनुमति मार्च नहीं निकालने की शर्त भी रखी गई थी, लेकिन बाद के प्रदर्शनों में इन शर्तों का कथित तौर पर पालन नहीं हुआ।

6 से 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों का भी हवाला

पुलिस कमिश्नर ने 10 अक्टूबर की अनुमति पर फैसला लेते समय 6, 7 और 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों को भी ध्यान में रखने की बात कही।

पुलिस के अनुसार, इन प्रदर्शनों के कारण सेंट्रल दिल्ली में कई घंटे तक यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार किया और कुछ महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी हुई।

पुलिस के मुताबिक, इन घटनाओं में एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए।

10 अक्टूबर को हिंसा की आशंका का दावा

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जुलाई की घटना और अक्टूबर के शुरुआती प्रदर्शनों के आधार पर खतरे का आकलन किया गया था।

पुलिस को आशंका थी कि 10 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च के दौरान हिंसा, पुलिस से टकराव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है।

पुलिस ने संसद, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा का भी हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ आम लोगों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

हिरासत में लिए गए लोगों पर पुलिस की सफाई

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के मामले में पुलिस ने कहा कि कार्रवाई खुफिया सूचनाओं और मौके की परिस्थितियों के आधार पर की गई।

पुलिस ने BNSS की धारा 163 और दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 का हवाला देते हुए कहा कि निषेधाज्ञा वाले क्षेत्रों में वैध निर्देशों का उल्लंघन करने वालों को प्रदर्शन स्थल से हटाना कानून के तहत किया गया कदम था।

पुलिस का दावा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटों के भीतर छोड़ दिया गया और उन्हें लॉकअप या जेल में नहीं रखा गया।

नेताओं को भोजन और अन्य सुविधाएं देने का दावा

हलफनामे में पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हटाए गए राजनीतिक नेताओं को पुलिस थानों के कार्यालयों में रखा गया। पुलिस के अनुसार, उन्हें भोजन, चाय, कॉफी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पूरी कार्रवाई को समय पर, आनुपातिक और कानून के अनुरूप बताया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को समाप्त करने की मांग भी की है।

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन की अनुमति रोकने और प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के लिए पुलिस द्वारा दिए गए ये कारण कानूनी तौर पर पर्याप्त हैं या नहीं।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version