इस खास आर्टिकल को प्रस्तुत है आपके सामने, जो एक साधारण व्यक्ति की असाधारण कहानी बयां करता है। इस लेख में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक बस कंडक्टर ने अपनी लगन और ज्ञान के प्रति प्रेम से इतिहास रच दिया।
India
oi-Smita Mugdha
Published: Sunday, January 25, 2026, 17:32 [IST]
Anke Gowda Padma Shri: कर्नाटक के मंड्या जिले के रहने वाले अंके गौड़ा ने यह साबित कर दिया है कि जुनून और समर्पण के आगे हालात मायने नहीं रखते। कभी बस कंडक्टर की नौकरी करने वाले अंके गौड़ा को भारत सरकार ने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। अंके गौड़ा ने अपनी पूरी ज़िंदगी ज्ञान के प्रसार के लिए समर्पित कर दी है।
उन्होंने मंड्या में “पुस्तका माने” यानी “किताबों का घर” नाम से एक अनोखी लाइब्रेरी की स्थापना की, जो आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी चर्चा का विषय बन चुकी है। उनकी इस निजी लाइब्रेरी में 10 लाख से अधिक किताबें मौजूद हैं, जिनमें 22 भारतीय और विदेशी भाषाओं की पुस्तकें शामिल हैं।
Anke Gowda Padma Shri: कंडक्टर की नौकरी करते हुए बनाई लाइब्रेरी
बस कंडक्टर की नौकरी के दौरान भी अंके गौड़ा किताबों से अपना रिश्ता नहीं तोड़ पाए। वे अपनी सीमित आमदनी का बड़ा हिस्सा किताबें खरीदने में लगा देते थे। धीरे-धीरे उनका निजी संग्रह इतना बड़ा हो गया कि उन्होंने इसे आम लोगों के लिए खोलने का फैसला किया। इसी सोच से “पुस्तका माने” की नींव पड़ी, जहां आज छात्र, शोधार्थी और पुस्तक प्रेमी बिना किसी शुल्क के किताबें पढ़ सकते हैं। अंके गौड़ा का मानना है कि किताबें समाज को बेहतर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
Anke Gowda ने घर और जमीन भी समर्पित की लाइब्रेरी को
अंके गौड़ा के लिए पढ़ना और ज्ञान कभी भी व्यावसायिक हितों के लिए नहीं था। उन्होंने कभी इसे व्यापार बनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने घर, जमीन और संसाधनों तक को ज्ञान के इस मंदिर के लिए समर्पित कर दिया। यही वजह है कि लोग उन्हें ‘ज्ञान का संरक्षक’ भी कहते हैं। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री दिए जाने की घोषणा के बाद पूरे कर्नाटक में खुशी की लहर है। साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इसे जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों की जीत बताया है।
अंके गौड़ा की कहानी आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि बड़े बदलाव के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बल्कि बड़ी सोच और निष्ठा की जरूरत होती है। बस कंडक्टर से पद्मश्री सम्मान तक का उनका सफर यह संदेश देता है कि अगर उद्देश्य नेक हो, तो एक व्यक्ति भी पूरे समाज की दिशा बदल सकता है।
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English summary
Anke Gowda Padma Shri bus conductor passionate about reading built library of 10 LAKH books KAUN HAIN ANKE gowda
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