BJP: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल के दौरे के बीच मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है. अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कटु आलोचक रहे हैं. चौधरी कई मौके पर तृणमूल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं.
वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस में हाशिए पर हैं. हालांकि पीएम से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों पर हो रहे हमले का मुद्दा उठाया और
ऐसे हमलों को रोकने में मदद के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की. इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भाजपा के खिलाफ मुखर रही है. अधीर रंजन चौधरी ने यह मुद्दा उठाकर ममता बनर्जी की इस मुद्दे पर बढ़त को कम करने का काम किया है.
अवेयर मीडिया नेटवर्क
तृणमूल के मुद्दे को छीनने की कोशिश
जानकारों का कहना है कि अधीर रंजन की प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय के राजनीतिक मायने हैं. लोकसभा चुनाव हारने के बाद चौधरी कांग्रेस में हाशिए पर हैं. वे जमीन पर संघर्ष करने वाले और जुझारू नेता रहे हैं. ऐसे में चुनाव से पहले अगर चौधरी भाजपा में शामिल होते हैं तो ममता के खिलाफ पार्टी को राज्य में एक मुखर आवाज मिल जाएगी.
गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ के मामला उठाकर साफ कर दिया है कि भाजपा चुनाव में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी. उन्होंने बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी करने के लिए जमीन नहीं देने का आरोप लगाया और कहा कि तृणमूल सरकार तुष्टीकरण के लिए अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने का काम कर रही है.
विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है भाजपा
बंगाल को जीतने के लिए भाजपा विशेष रणनीति पर काम कर रही है. जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म और कर्मस्थली होने के बावजूद पश्चिम बंगाल में भाजपा का सियासी जनाधार कभी मजबूत नहीं बन पाया. आजादी के बाद कांग्रेस की सरकार बनी और फिर तीन दशक से अधिक समय तक वाम मोर्चा का शासन रहा. वाम मोर्चा के शासन को खत्म कर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस लगभग 15 साल से सत्ता में हैं. हालांकि पिछले एक दशक में राज्य की राजनीति में बदलाव आया है और भाजपा प्रमुख विपक्षी दल बन गयी है.
बंगाल जीतना भाजपा के लिए अब भी चुनौती
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्षी दल के तौर पर स्थापित होने में कामयाब हो गयी. पिछले एक दशक में भाजपा ऐसे राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही है, जहां पार्टी के लिए सीट जीतना भी मुश्किल था. त्रिपुरा में भाजपा ने वाम दलों के वर्चस्व को समाप्त कर सरकार बनाने में सफलता हासिल की.
फिर असम में भी दो बार से सत्ता में है और तीसरी बार पार्टी सरकार बनाने की कवायद में जुटी है. इसके अलावा ओडिशा में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी है. लेकिन पार्टी की प्राथमिकता पश्चिम बंगाल में भी सरकार बनाने की रही है. अगर भाजपा ऐसा करने में कामयाब होती है तो इसका राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक असर पड़ना तय है. इससे पार्टी की वैचारिक सोच को मजबूती मिलेगी.
हालांकि पिछली बार के विधानसभा चुनाव से सबक लेते हुए भाजपा वर्ष 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अधिक सतर्क और सधी रणनीति पर काम कर रही है. इस कड़ी में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दो दिवसीय बंगाल दौरा अहम माना जा रहा है. गृह मंत्री ने मंगलवार को साफ कहा कि घुसपैठ रोकने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तृणमूल सरकार का सत्ता से बाहर होना जरूरी है.
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