दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग में सेना के दो कमांडो लापता: सघन तलाशी अभियान जारी
दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग स्थित घने गडोले वन क्षेत्र में सोमवार से सेना की विशिष्ट 5 पैरा यूनिट के दो जांबाज कमांडो का कोई अता-पता नहीं है। उनकी गुमशुदगी ने सुरक्षा महकमे में हलचल मचा दी है, जिसके चलते संयुक्त सुरक्षा बलों ने इस दुर्गम इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लापता हुए जवान अग्निवीर श्रेणी के हैं।
तलाशी अभियान के शुरुआती क्षणों में, सुरक्षा बल पूरी शिद्दत के साथ लापता कमांडो की तलाश में जुटे हुए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये दोनों जवान 6 अक्टूबर की शाम को किश्तवाड़ और अनंतनाग के बीच स्थित इस वन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन के दौरान लापता हुए थे। उनकी गुमशुदगी की खबर मिलते ही, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की कई इकाइयों को हवाई टोही के समर्थन के साथ इस घने और दुर्गम इलाके में तैनात कर दिया गया है, ताकि हर संभव कोने की छानबीन की जा सके।
आतंकी संलिप्तता से इनकार, भटकने की आशंका
हालांकि इस घटना के संबंध में आधिकारिक तौर पर बहुत अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अभियान से जुड़े सूत्र किसी भी तरह की आतंकी संलिप्तता से साफ इनकार कर रहे हैं। वर्तमान में सुरक्षा प्रतिष्ठान का यह मानना है कि दोनों जवान इलाके में चल रहे ऑपरेशन के दौरान शायद रास्ता भटक गए हों। यह गौरतलब है कि गडोले के जंगल आतंकवादियों के लिए पहले भी ठिकाना रहे हैं। 2023 में, इसी जंगल क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ में सेना के कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष डोनचक और पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) हुमायूं मुज़म्मिल जैसे वीर सपूतों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि अतीत में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों के आतंकवादियों ने भी इन जंगलों का इस्तेमाल अपने ठिकानों के तौर पर किया है। हालांकि, वर्तमान में लापता हुए दोनों जवानों के गुम होने की परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, सेना की बड़ी टुकड़ियां इस पूरे इलाके में तैनात हैं और जंगल के हर “चप्पे-चप्पे” की बारीकी से तलाशी ली जा रही है।
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