
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी सरगर्मियों के बीच मुख्य विपक्षी पार्टी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने जैसे ही अपना मेनिफेस्टो जारी किया, राजनीति के मैदान में एक नई जंग छिड़ गई। जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा दांव चला है जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने BNP के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान को ‘लाइव पब्लिक डिबेट’ के लिए खुला चैलेंज दे दिया है।
“सियासत गंदी नहीं होती”: नई जनरेशन को संदेश
शफीकुर रहमान ने अपने फेसबुक पेज के जरिए एक विजन पेश किया है। उनका मानना है कि जुलाई 2025 की उथल-पुथल और विरोध प्रदर्शनों के बाद अब बांग्लादेशी नेताओं को राजनीति का चेहरा बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें ‘Gen Z’ (आज के युवाओं) को यह साबित करके दिखाना होगा कि राजनीति बिना कीचड़ उछाले और पूरी शालीनता के साथ भी की जा सकती है। शफीकुर के मुताबिक, एक खुला मंच पारदर्शिता लाएगा और जनता को अपने भविष्य के नेताओं को परखने का सीधा मौका मिलेगा।
जमात-ए-इस्लामी का ‘मिशन 41’: नैतिकता और जवाबदेही पर जोर
जमात-ए-इस्लामी ने ढाका के बनानी इलाके से अपना 41-सूत्रीय मेनिफेस्टो पेश किया, जिसमें 26 मुद्दों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर रखा गया है। शफीकुर रहमान का कहना है कि उनकी पार्टी पुराने ढर्रे को तोड़कर नैतिकता के आधार पर काम करना चाहती है। उनके रोडमैप की मुख्य विशेषताएं हैं:
- नारी शक्ति और सुरक्षा: शासन और चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना।
- युवा नेतृत्व: रोजगार के नए अवसर पैदा करना और यूथ लीडरशिप को बढ़ावा देना।
- सिस्टम का कायाकल्प: बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में क्रांतिकारी सुधार लाना।
- इंसाफ की पुकार: अतीत में हुई गैर-न्यायिक हत्याओं (Extra-judicial killings) के मामलों में जवाबदेही तय करना और न्याय दिलाना।
वहीं दूसरी तरफ, BNP ने अपने मेनिफेस्टो में बड़े प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों का खाका खींचा है। अगर BNP सत्ता में आती है, तो उनके वादे कुछ इस प्रकार हैं:
- PM पद की समय सीमा: प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कोई भी व्यक्ति 10 साल से अधिक समय तक नहीं रह सकेगा।
- योग्यता को सम्मान: सरकारी नौकरियों में सिफारिश नहीं, बल्कि केवल ‘मेरिट’ (काबिलियत) ही आधार होगी।
- महंगाई से राहत: बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के साथ ही गरीब परिवारों को सीधा आर्थिक सहयोग प्रदान करना।
- भ्रष्टाचार मुक्त शासन: सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता लाना और कानून का राज स्थापित करना।
चुनौती बड़ी है: क्या डिबेट के लिए तैयार होंगे तारिक रहमान?
शफीकुर रहमान ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जनता का विश्वास जीतने का एकमात्र तरीका निष्पक्ष चुनाव और खुली चर्चा है। उन्होंने तारिक रहमान को ललकारते हुए कहा, “चूंकि आपने अपना प्लान जनता के सामने रख दिया है, तो आइए अब एक खुले मंच पर चर्चा करें ताकि अवाम खुद तय कर सके कि किसका विजन दमदार है।” अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या BNP इस ऐतिहासिक चुनौती को स्वीकार करती है या नहीं।
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