मंत्रिमंडल ने त्वरित अदालतों के लिए 3,788 करोड़ रुपये मंजूर किए

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मंत्रिमंडल ने त्वरित अदालतों के लिए 3,788 करोड़ रुपये मंजूर किए
union cabinet approves rs 3788 crore for 850 fast track special courts

महिलाओं और बच्चों के लिए न्याय अब और होगा तेज: देश में 5 साल के लिए बढ़ीं ‘फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट’

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट’ (FTSC) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को पांच साल और बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य बलात्कार के मामलों और ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज अपराधों में त्वरित सुनवाई और समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। यह योजना अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी और इसके तहत देश भर में मौजूदा 779 सक्रिय अदालतों के नेटवर्क का विस्तार करके इनकी संख्या 850 कर दी जाएगी। उम्मीद है कि इस फैसले से महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों के लंबित मामलों को निपटाने में न्यायिक प्रणाली की क्षमता मजबूत होगी। इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस योजना के जारी रहने से न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को एक्स पर लिखा, कम देरी, जल्दी न्याय!

फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के लिए 3,788 करोड़ रुपये आवंटित

इस योजना को कुल 3,788.04 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है। इसमें से केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये देगी, जबकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मिलकर 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। केंद्र सरकार का हिस्सा ‘निर्भया फंड’ से दिया जाएगा। स्वीकृत फंडिंग व्यवस्था के तहत, इन अदालतों के संचालन खर्च को पूरा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जाती रहेगी।

देश भर में 850 अदालतें काम करेंगी

इस विस्तारित योजना के तहत, सरकार फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या को मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है। यह विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि किस जिले में बलात्कार और POCSO (पोक्सो) से जुड़े कितने मामले लंबित हैं। हर अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) और छह सहायक कर्मचारी होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन संवेदनशील मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और इनकी सुनवाई व फैसला जल्द से जल्द हो सके। इन अदालतों को ‘वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर’ (संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के केंद्र) और विशेष रूप से तैयार की गई कोर्टरूम सुविधाओं का भी सहयोग मिलेगा। इन इंतजामों का मकसद पीड़ितों और गवाहों को न्यायिक कार्यवाही के दौरान एक सुरक्षित, अधिक आरामदायक और बच्चों के अनुकूल माहौल प्रदान करना है।

इस विस्तारित योजना से बलात्कार और POCSO मामलों के पीड़ितों को क्या लाभ होगा?

योजना को जारी रखने से बलात्कार और POCSO मामलों के बड़े बैकलॉग (लंबित मामलों) को निपटाने में मदद मिलेगी, जिससे पीड़ितों को कम समय में न्याय मिल सकेगा। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देकर, यह पहल समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने का प्रयास करती है। विशेष रूप से तैयार की गई अदालती सुविधाएं और समर्पित कर्मचारी, न्यायिक प्रक्रिया को पीड़ितों खासकर बच्चों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएंगे।

सरकार फास्ट ट्रैक अदालतों के कामकाज की निगरानी करेगी

न्याय विभाग, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर इस विस्तारित योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। अदालतों के कामकाज पर नज़र रखने के लिए FTSC डैशबोर्ड, समय-समय पर आने वाली प्रगति रिपोर्ट और खर्च के विवरण का उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार, योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के लिए उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ नियमित परामर्श भी करेगी। इस नेटवर्क का विस्तार अलग-अलग जिलों में लंबित बलात्कार और POCSO मामलों की संख्या पर निर्भर करेगा, ताकि जिन जगहों पर सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां अतिरिक्त अदालतें स्थापित की जा सकें।


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