US Stock Market Rally: अमेरिकी शेयर बाजार में कल निवेशकों की चांदी हो गई और इसका पूरा श्रेय डोनाल्ड ट्रंप की हार को दिया जा रहा है। आखिर इसके पीछे की असली कहानी क्या है? दरअसल, ट्रंप की हार के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में ऐसा भूचाल आया कि डाउ जोन्स ने पिछले 18 महीनों का अपना सबसे बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया। आइए जानते हैं कि आखिर अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को इस करारी शिकस्त का सामना क्यों करना पड़ा और इसका ग्लोबल मार्केट पर क्या असर देखने को मिला।
मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया, जहां डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को भारी पराजय झेलनी पड़ी। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर हुए इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मार ली। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 218 सीटों का था, जिसे पार करते हुए डेमोक्रेट्स ने 228 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं, इसके मुकाबले ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी महज 139 सीटों पर सिमट कर रह गई और उसने प्रतिनिधि सभा में अपना नियंत्रण खो दिया।
ईरान युद्ध बना हार की सबसे बड़ी वजह
विश्लेषकों का मानना है कि रिपब्लिकन पार्टी के इस पतन के पीछे ईरान के साथ चल रहा संघर्ष सबसे अहम वजह रहा है। हाल ही में सामने आए एक सर्वे ने अमेरिकी जनता के गुस्से की असली वजह बेनकाब कर दी है। सर्वे के अनुसार, ईरान युद्ध के दुष्परिणामों ने आम अमेरिकी नागरिकों की कमर तोड़ दी थी, जिसमें आसमान छूती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, घरेलू खर्चों का बोझ और सरकार की नीतियों के प्रति भारी नाराजगी शामिल थी। यहाँ तक कि खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध ही ट्रंप की इस हार का सबसे बड़ा कारण साबित हुआ।
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ट्रंप की हार का जश्न मना रहा शेयर बाजार
जैसे ही ट्रंप की चुनावी हार के आंकड़े टेलीविजन स्क्रीन पर चमके, वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी शेयर बाजार ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। अमेरिका का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स डाउ जोन्स 1,569 अंकों यानी पूरे 3.03% की ऐतिहासिक छलांग के साथ बंद हुआ, जो पिछले डेढ़ साल की सबसे तूफानी तेजी है। सिर्फ इतना ही नहीं, S&P-500 इंडेक्स भी 119 अंकों की मजबूती के साथ 7,688 पर थमा, जबकि नैस्डैक (NASDAQ) इंडेक्स 364 अंकों की शानदार बढ़त लेकर 25,736 के स्तर पर जा पहुंचा। ट्रंप की इस सियासी हार का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर साफ दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम धड़ाम से नीचे आ गिरे। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव एक झटके में 10 फीसदी लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। इसके साथ ही एशियाई बाजारों में भी बहार लौट आई, जहाँ हांगकांग का हैंगसेंग और ब्रिटेन का FTSE-100 इंडेक्स जबरदस्त तेजी के साथ कारोबार करते हुए नजर आए।
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