छठ के बाद घर वापसी की भागमभाग: रेलवे ने 74 स्पेशल ट्रेनों के साथ संभाला यात्रियों का सैलाब
छठ पूजा के अंतिम अर्घ्य के साथ ही, जब आस्था का ज्वार शांत हुआ, स्टेशनों पर एक नए प्रकार की भीड़ उमड़ने लगी – वो भीड़, जो अपने कर्मस्थलों की ओर लौट रही थी। प्रवासी मजदूर, छात्र और अन्य कामकाजी लोग, अपने परिवारों से विदा लेकर एक बार फिर अपनी मंज़िल की ओर निकल पड़े। इस विशाल जनसमूह को सुगम यात्रा प्रदान करने के उद्देश्य से, भारतीय रेलवे ने 29 अक्टूबर से 74 विशेष ट्रेनों का परिचालन शुरू किया है। ये ट्रेनें बिहार के प्रमुख रेलवे स्टेशनों – पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर टर्मिनल, दानापुर और पाटलिपुत्र से विभिन्न गंतव्यों के लिए रवाना होंगी।
यह व्यवस्था तब की गई है, जब नियमित ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता समाप्त हो चुकी है और तत्काल टिकटों के लिए मारामारी मची हुई है। टिकट काउंटरों से लेकर प्लेटफॉर्म तक, यात्रियों की लंबी कतारें छठ के बाद वापसी की परंपरा को जीवंत कर रही हैं।
पटना से राहत की स्पेशल ट्रेनें
रेलवे प्रशासन के अनुसार, अकेले पटना जंक्शन से पांच, दानापुर से नौ, जबकि राजेंद्र नगर टर्मिनल और पाटलिपुत्र स्टेशन से एक-एक विशेष ट्रेन संचालित की जाएंगी। ये ट्रेनें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, सिकंदराबाद, भोपाल, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए अत्यंत राहतकारी साबित होंगी।
दानापुर मंडल से चलने वाली प्रमुख स्पेशल ट्रेनों में दानापुर-एलटीटी, दानापुर-पुणे, दानापुर-चलपल्ली, दानापुर-बेंगलुरु और दानापुर-सिकंदराबाद स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पटना से थावे, आनंद विहार टर्मिनल, निजामुद्दीन और चलपल्ली के लिए भी अस्थायी ट्रेनें चलाई जा रही हैं। डाउन दिशा में भी 37 ट्रेनें यात्रियों को लेकर लौटेंगी। इस प्रकार, कुल 74 विशेष ट्रेनों के माध्यम से रेलवे इस भारी भीड़ को संभालने की तैयारी में है।
शाम ढलते ही स्टेशनों पर दिखी यात्रियों की महासागर
मंगलवार की शाम तक पटना का माहौल शांत था, लेकिन सूर्य अर्घ्य के समाप्त होते ही रेलवे स्टेशनों पर पैर रखने की भी जगह नहीं बची। छठ मनाकर सीधे स्टेशन पहुंचे यात्रियों की लहरों ने प्लेटफॉर्मों को पूरी तरह से भर दिया। तेजस, संपूर्ण क्रांति, मगध एक्सप्रेस और राजधानी जैसी नियमित ट्रेनों में तिल धरने की भी जगह नहीं थी।
कई यात्रियों ने भीड़ से बचने के लिए राजेंद्र नगर टर्मिनल की ओर रुख किया, लेकिन वहां भी हालात कुछ भिन्न नहीं थे। आरपीएफ और टीटीई की अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया, ताकि बिना टिकट यात्रियों को मुख्य ट्रेनों से निकालकर विशेष ट्रेनों में भेजा जा सके। देर रात तक स्टेशनों पर घोषणाओं और यात्रियों की चहल-पहल जारी रही।
टिकट के लिए सुबह से रात तक जद्दोजहद
पटना जंक्शन और राजेंद्र नगर टर्मिनल के टिकट काउंटरों पर बुधवार की सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा समाप्त कर सीधे टिकट लेने पहुंचे। आरक्षण काउंटरों पर घंटों इंतजार के बाद भी निराशा ही हाथ लगी, वहीं ऑनलाइन बुकिंग पोर्टलों पर भी ‘वेटिंग’ लिस्ट सामान्य हो गई।
हालांकि, रेलवे ने तत्काल योजना के तहत अतिरिक्त डिब्बे जोड़कर और विशेष ट्रेनें चलाकर यात्रियों का बोझ कुछ हद तक कम करने का प्रयास किया है। बावजूद इसके, राजधानी दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों के लिए टिकट मिलना अब भी एक चुनौती बनी हुई है। कई यात्रियों ने बताया कि ‘जिन लोगों को टिकट नहीं मिले, वे बस या निजी वाहनों से यात्रा करने को मजबूर हैं।’
दानापुर मंडल में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
छठ के बाद लौटने वाले यात्रियों की इस भारी भीड़ को सुचारू रूप से संभालने के लिए दानापुर मंडल प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती है। सभी प्रमुख स्टेशनों पर वरीय अधिकारियों की तैनाती की गई है। आरा और बक्सर जैसे जंक्शनों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और आरपीएफ कर्मियों की निगरानी में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं। प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री को भी सीमित कर दिया गया है, ताकि केवल यात्री ही स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकें।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अगले एक सप्ताह तक यह भीड़ बनी रहेगी, क्योंकि धीरे-धीरे लोग अपने काम पर लौट रहे हैं। कुल 74 विशेष ट्रेनें अगले चार दिनों में विभिन्न गंतव्यों के लिए नियमित रूप से चलती रहेंगी।
प्रवासी वापसी की चुनौती, रेलवे की विशेष पहल
छठ पर्व के दौरान रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों की भारी संख्या को नियंत्रित करना है। पटना-दिल्ली मार्ग वर्तमान में सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक है, जहां हर ट्रेन खचाखच भरी हुई है और वेटिंग लिस्ट 400 से 500 तक पहुंच गई है। नियमित ट्रेनों में जगह न मिलने की स्थिति को देखते हुए, रेलवे ने तेजस, राजधानी, संपर्क क्रांति और मगध जैसी ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़ने का निर्णय लिया है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि विशेष ट्रेनों के परिचालन के लिए उन मार्गों को प्राथमिकता दी गई है, जहां से प्रवासी कर्मचारी और छात्र सबसे अधिक संख्या में लौटते हैं। विशेष रूप से मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए एक विशेष समय-सारणी जारी की गई है।
यात्रा में संयम और सुरक्षा की अपील
छठ के समापन के साथ ही, त्योहार की थकान को पीछे छोड़ते हुए, देशभर के कामकाजी लोग एक बार फिर अपने कर्मस्थलों की ओर रवाना हो रहे हैं। यही कारण है कि बिहार के स्टेशनों पर हर साल की तरह इस बार भी वापसी का सैलाब उमड़ पड़ा है। रेलवे प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों के सिरों का यह समंदर, आस्था और संघर्ष दोनों की एक मार्मिक तस्वीर पेश कर रहा है।
आने वाले कुछ दिनों तक पटना से दिल्ली मार्ग पर यातायात का दबाव सर्वाधिक रहेगा। इस भीड़ को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए, रेलवे ने पटरी किनारे हेल्प डेस्क और सूचना केंद्र स्थापित किए हैं, ताकि यात्रियों को ट्रेन की समय-सारणी और प्लेटफॉर्म संबंधी जानकारी आसानी से मिल सके।
रेलवे ने यात्रियों से बिना टिकट यात्रा न करने और भीड़ से बचने के लिए समय से पहले स्टेशन पहुंचने की अपील की है। ट्रेनों में चढ़ते समय किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी से बचने की भी सलाह दी गई है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि सभी विशेष ट्रेनों की विस्तृत समय-सारणी आधिकारिक वेबसाइट और स्टेशन सूचना पटल पर उपलब्ध है।
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