कफ सिरप त्रासदी: डॉक्टर पर आरोप, मेडिकल स्टोर निलंबित, और नियामक प्रणाली पर सवाल
मध्य प्रदेश में कथित तौर पर 14 बच्चों की मौत का कारण बने दूषित कफ सिरप मामले में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बढ़ती जांच के बीच, राज्य सरकार ने उनके परिवार के सदस्य के स्वामित्व वाले एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। सरकार अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि छिंदवाड़ा जिले के परासिया तक दूषित कफ सिरप की इतनी बड़ी खेप कैसे पहुंची। जबलपुर से परासिया के लिए 600 से अधिक दूषित कफ सिरप भेजे गए थे, जिनमें से एक बड़ी खेप परासिया के लिए रवाना हुई थी।
डॉक्टरों का संगठन बचाव में, नियामक प्रणाली पर उठाया सवाल
वहीं, भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने इस मामले में गिरफ्तार एक डॉक्टर का बचाव करते हुए कहा है कि कफ सिरप की मंजूरी और उसकी गुणवत्ता की निगरानी पूरी तरह से औषधि नियामक प्रणाली के अधिकार क्षेत्र में आती है। आईएमए ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन, कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा पर नजर रखने में विफल रहे।
तमिलनाडु की रिपोर्ट में फार्मास्युटिकल कंपनी में गंभीर खामियां उजागर
इंडिया टुडे टीवी द्वारा विशेष रूप से प्राप्त तमिलनाडु सरकार की 26-पृष्ठ की रिपोर्ट ने कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल में घोर उल्लंघनों और अस्वच्छ प्रथाओं का खुलासा किया है। इसी कंपनी के कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ को मध्य प्रदेश में 14 और राजस्थान में दो बच्चों की मौत से जोड़ा गया है।
निर्माण में 350 से अधिक खामियां, अस्वच्छ परिस्थितियां
तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में निर्माण प्रक्रिया में 350 से अधिक खामियां पाई गईं। अधिकारियों ने इन उल्लंघनों को ‘गंभीर’ और ‘प्रमुख’ की श्रेणी में रखा। रिपोर्ट के अनुसार, फर्म में बुनियादी सुविधाओं, योग्य कर्मचारियों और उत्पाद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रक्रियाओं का अभाव था।
गंदे परिसर, गुणवत्ता जांच का अभाव, और गैर-फार्मा ग्रेड रसायनों का प्रयोग
निरीक्षकों ने बताया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप का निर्माण अस्वच्छ परिस्थितियों में हो रहा था। निर्माण स्थल पर एयर हैंडलिंग यूनिट (AHU) का अभाव था, वेंटिलेशन खराब था, और उपकरण क्षतिग्रस्त या जंग लगे हुए थे। प्लांट का लेआउट और डिजाइन भी संदूषण के जोखिम को बढ़ा रहा था।
गुणवत्ता आश्वासन विभाग नदारद था, और बैचों की मंजूरी की निगरानी के लिए कोई अधिकृत व्यक्ति नियुक्त नहीं था। उत्पादों को वापस बुलाने या गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने न तो कोई गाउनिंग प्रक्रिया अपनाई थी, न ही जीएमपी ड्रेन, शुद्ध जल प्रणाली, कीट नियंत्रण या सफाई व्यवस्था की सुविधा प्रदान की थी। उत्पादों को उन गलियारों और जगहों पर संग्रहित किया जा रहा था जहाँ AHU काम नहीं कर रहे थे, जिससे वे धूल और क्रॉस-संदूषण के संपर्क में आ रहे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कंपनी ने बिना चालान के 50 किलोग्राम प्रोपिलीन ग्लाइकॉल खरीदा था, जो अवैध खरीद का संकेत देता है। सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) के अंश भी पाए गए, जो एक अत्यधिक विषैला औद्योगिक विलायक है। प्रोपिलीन ग्लाइकॉल की जगह डीईजी का इस्तेमाल दुनिया भर में विषाक्तता की घटनाओं का एक ज्ञात कारण है, जिसमें मध्य प्रदेश में हुई हालिया मौतों का मामला भी शामिल है।
अधिकारियों ने यह भी पाया कि कंपनी तरल फ़ॉर्मूलेशन को स्थानांतरित करने के लिए प्लास्टिक पाइप का इस्तेमाल करती थी, कोई फ़िल्टरेशन सिस्टम नहीं था, और रासायनिक अपशिष्टों को सीधे सामान्य नालियों में पंप करती थी। शुद्ध पानी के टैंक भी अस्वास्थ्यकर स्थिति में पाए गए।
कच्चा माल बिना परीक्षण या विक्रेता की अनुमति के जारी किया गया था, और प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं पर नज़र रखने के लिए कोई फार्माकोविजिलेंस प्रणाली नहीं थी। नमूने खुले वातावरण में लिए गए थे, जिससे संदूषण की संभावना बढ़ गई थी। कीटों या कृन्तकों के प्रवेश को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं थे, और उत्पादन क्षेत्रों में फ़िल्टर की गई हवा का वेंटिलेशन नहीं था। कंपनी में कुशल कर्मचारियों की भी कमी थी, और प्रमुख गुणवत्ता जांचें कभी नहीं की गईं।
सरकारी कार्रवाई: प्रतिबंध और निलंबन
तमिलनाडु सरकार ने निरीक्षण के बाद, 1 अक्टूबर से पूरे राज्य में कफ सिरप कोल्ड्रिफ की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया और बाजार से सभी मौजूदा स्टॉक को हटाने का आदेश दिया। संयंत्र से एकत्र किए गए नमूनों में मिलावट की पुष्टि होने के बाद, निर्माता से स्पष्टीकरण मांगा गया और अगले आदेश तक उत्पादन बंद कर दिया गया।
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के बाद देशव्यापी अलर्ट जारी कर दिया गया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने आगे की जांच तक कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और राज्य औषधि नियंत्रक का तबादला कर दिया है।
तमिलनाडु सरकार के निष्कर्षों से स्पष्ट है कि यदि निर्माता ने बुनियादी दवा सुरक्षा मानदंडों का भी पालन किया होता, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


