सीबीआई का वार: रक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, 3.5 लाख की रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार
नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय में उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वायुसेना केंद्र पर सीसीटीवी लगाने के आपूर्ति आदेश को मंजूरी देने के बदले 3.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रक्षा लेखा महानियंत्रक (सीजीडीए) के एकीकृत आर्थिक सलाहकार (आईएफए) के एक अधिकारी को रंगेहाथों गिरफ्तार किया। शुक्रवार को सामने आई इस कार्रवाई ने रक्षा सौदों में संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है।
कैसे हुआ खुलासा?
मामला तब सामने आया जब एक सीसीटीवी कंपनी के मालिक ने सीबीआई से संपर्क कर बताया कि गांधीनगर (गुजरात) स्थित सीजीडीए के आईएफए के लेखा परीक्षक/कार्मिक अशोक कुमार जादव और वायुसेना के एक हवलदार ने 2.5 करोड़ रुपये के कुल अनुबंध आदेश को मंजूरी देने के एवज में चार लाख रुपये, यानी अनुबंध राशि का करीब 2 प्रतिशत, रिश्वत की मांग की है।
सीबीआई का जाल और हवलदार की चालाकी
पुणे स्थित सीबीआई अधिकारियों ने शिकायत का सत्यापन किया। हालांकि, जिस हवलदार का नाम रिश्वत की मांग में सामने आया था, उसने फोन का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बावजूद, व्यवसायी द्वारा प्रस्तुत की गई रिकॉर्डिंग में अशोक कुमार जादव की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
सत्यापन के बाद, सीबीआई ने सोमवार को एक सुनियोजित जाल बिछाया। इस जाल में अशोक कुमार जादव 3.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार हो गए। सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर बताया, “आरोपी को गिरफ्तार कर अहमदाबाद के विशेष न्यायाधीश से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद पुणे के विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे चार अक्टूबर, 2025 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।”
यह गिरफ्तारी रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सीबीआई आगे की जांच में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है।
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