ठगी का जाल: बिहार से दिल्ली-मुंबई तक फैला ई-कॉमर्स कंपनी का धोखा!
बिहार: डल्स ई-कॉम इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, एक ई-कॉमर्स डिलीवरी कंपनी, ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर करोड़ों रुपये की चपत लगा दी। दिल्ली और मुंबई में अपने आलीशान दफ्तर दिखाकर निवेशकों का विश्वास जीतने वाली इस कंपनी ने ठगी का एक ऐसा जाल बुना, जिसमें बिहार के दर्जनों लोग फंस गए।
सपनों की डिलीवरी नहीं, ठगी का पार्सल
मुजफ्फरपुर, पटना, हाजीपुर, मधुबनी से लेकर गया तक, राज्य के कोने-कोने से लोग इस ठगी का शिकार हुए। कंपनी ने ऑनलाइन विज्ञापनों के ज़रिए देश भर में अपना कुरियर और डिलीवरी नेटवर्क फैलाने का दावा किया। पीड़ितों को विश्वास दिलाने के लिए दिल्ली और कोलकाता ले जाकर उनके दफ्तर और कर्मचारियों से मुलाकात कराई गई।
कंपनी के सीईओ अरुण कुमार दास, निदेशक रवि चौधरी और वीएस शिवराम सिंह ने मिलकर निवेशकों को अलग-अलग योजनाओं में पैसा लगाने के लिए राजी किया। अनुबंध के अनुसार, 45 दिनों के भीतर फ्रेंचाइजी का काम शुरू होना था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कुछ शुरू नहीं हुआ। मार्च 2025 तक, कंपनी ने सभी राज्यों के दफ्तर बंद कर दिए और पदाधिकारी गायब हो गए।
बिहार में दर्जनों लोग बने शिकार
मुजफ्फरपुर की नेहा सिंह ने 12.5 लाख, विकास कुमार ने 9 लाख और विशाल कुमार ने 1.5 लाख रुपये गंवाए। पटना के रवि और विवेक कुमार से 28 लाख, जबकि प्रताप कुमार से 12.5 लाख वसूले गए। हाजीपुर के हर्ष राज से 9.5 लाख, मधुबनी की सुगम कुमारी से 12.5 लाख और सहरसा के कन्हैया झा से 9.5 लाख रुपये लिए गए। लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, सारण, गया और समस्तीपुर के लोग भी ठगी के शिकार हुए। बिहार से ही इस फर्जी कंपनी ने करीब एक करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम ऐंठी है, जबकि पीड़ितों का दावा है कि पूरे देश से करीब तीन हजार करोड़ रुपये की ठगी हुई है।
ईओयू ने संभाली जांच, बड़ी साजिश का अंदेशा
पीड़ितों की शिकायत पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने कंपनी के मालिक समेत 25 लोगों पर केस दर्ज किया है। ईओयू को शक है कि यह एक संगठित ठगी है, जिसमें देश भर के लोगों को निशाना बनाया गया है। इंस्पेक्टर आदित्य अंशु को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ईओयू का मानना है कि यह कोई साधारण ठगी नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय नेटवर्क के ज़रिए चलाया गया घोटाला है।
ठगी की स्क्रिप्ट और चुप्पी की साजिश
यह ठगी एक सुनियोजित पटकथा का हिस्सा थी। ऑनलाइन विज्ञापन, बड़े शहरों के ऑफिस का दौरा, अनुबंध और निवेश – हर कदम पेशेवर तरीके से रचा गया था। कंपनी के अधिकारियों ने बार-बार नए आश्वासन देकर समय बिताया, और जब तक भरोसा पूरी तरह टूट गया, तब तक दफ्तर खाली हो चुके थे। आज, पीड़ित न केवल अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठे हैं, बल्कि कई लोग कर्ज में भी डूब गए हैं। वे निवेश वापस पाने और जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
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