लोकतंत्र का रक्षक: संविधान, जनता की आवाज़

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- News Desk
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if democracy is at stake people should protect the guidance provided by constitution mamata

संविधान दिवस पर ममता बनर्जी का आह्वान: लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद की रक्षा करें!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संविधान दिवस के अवसर पर देशवासियों से एक महत्वपूर्ण आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद पर संकट मंडरा रहा हो, तो हमें संविधान द्वारा दिए गए अमूल्य मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए।

संविधान: भारत की एकता और विविधता का प्रतीक

बनर्जी ने संविधान को राष्ट्र की रीढ़ बताया, जो भारत की विविध संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों को एक सूत्र में पिरोता है। उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में संविधान और इसके निर्माताओं, विशेष रूप से डॉ. बी.आर. आंबेडकर, के प्रति गहरा सम्मान और श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने संविधान सभा में बंगाल के उन सदस्यों को भी नमन किया, जिन्होंने संविधान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरा मानना है कि हमारा संविधान हमारे राष्ट्र की रीढ़ है, जो हमारी संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की अपार विविधता को कुशलतापूर्वक एक एकीकृत, संघीय ढांचे में पिरोता है।” उन्होंने इस पवित्र दिन पर संविधान में निहित मूल लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और उन सिद्धांतों की रक्षा करने का संकल्प लिया जो भारत को एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करते हैं।

वर्तमान परिदृश्य पर चिंता

बनर्जी ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “जब लोकतंत्र दांव पर है, जब धर्मनिरपेक्षता खतरे में है, जब संघवाद को ध्वस्त किया जा रहा है, ऐसे महत्वपूर्ण समय में हमें अपने संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यवान मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए।”

संविधान दिवस का महत्व

गौरतलब है कि 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार किए जाने की स्मृति में है। संविधान के कुछ प्रावधान तत्काल लागू हो गए थे, जबकि शेष 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने पर प्रभावी हुए।


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