‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ: राष्ट्रीय गीत के गौरव और विवादों की कहानी
बंकिम चंद्र चटर्जी की अमर रचना ‘वंदे मातरम’, जो भारत की स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है, आज 150 वर्ष की हो गई है। 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में पहली बार प्रकाशित यह गीत, जिसका अर्थ है “माँ, मैं तुम्हें नमन करता हूँ”, चटर्जी के उत्कृष्ट उपन्यास ‘आनंदमठ’ का एक अभिन्न अंग है। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा संगीतबद्ध इस गीत को 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था, जिसने राष्ट्रवाद की भावना को नई ऊर्जा दी।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल और भाजपा का कांग्रेस पर आरोप
‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साल तक चलने वाले भव्य समारोहों का उद्घाटन करने की तैयारी में हैं। इस अवसर पर, भाजपा ने कांग्रेस पर एक गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने 1937 में ‘वंदे मातरम’ के संक्षिप्त संस्करण को अपनाया था, और जानबूझकर देवी दुर्गा की स्तुति वाले छंदों को हटा दिया था।
कांग्रेस का “सांप्रदायिक एजेंडा” और नेहरू का पत्र
केसवन ने कहा कि कांग्रेस ने अपने “सांप्रदायिक एजेंडे” को आगे बढ़ाते हुए फैज़पुर अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ का छोटा रूप अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर जानबूझकर देवी माँ दुर्गा से संबंधित छंदों को हटा दिया। भाजपा नेता ने 1937 में नेहरू द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लिखे एक पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें नेहरू ने कथित तौर पर कहा था कि ‘वंदे मातरम’ की पृष्ठभूमि “मुसलमानों को नाराज़ कर सकती है”। केसवन ने इस विचार को “एक ऐतिहासिक भूल” करार दिया जिसने गीत के राष्ट्रीय प्रतीकवाद को कमज़ोर किया।
“हिंदू-विरोधी मानसिकता” का आरोप और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
केसवन ने यह भी आरोप लगाया कि नेहरू की “हिंदू-विरोधी मानसिकता” कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया टिप्पणियों में भी दिखाई देती है, जिन्होंने पवित्र छठ पूजा को “एक नाटक” बताकर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। यह आरोप प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘वंदे मातरम’ के आधिकारिक स्मरणोत्सव का उद्घाटन करने से कुछ घंटे पहले आया है, जिसमें एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा, और राष्ट्रव्यापी स्तर पर गीत का गायन होगा, जो नवंबर 2026 तक चलने वाले समारोहों की शुरुआत का प्रतीक होगा।
गृह मंत्री शाह का ‘वंदे मातरम’ पर उद्गार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह गीत आज भी देशवासियों के हृदय में राष्ट्रवाद की अमर ज्योति प्रज्वलित करता है और युवाओं में एकता, देशभक्ति तथा नवीन ऊर्जा का स्रोत बना हुआ है। शाह ने जोर देकर कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ देश को एकजुट किया और स्वतंत्रता की चेतना को सशक्त बनाया।
यह 150वीं वर्षगांठ न केवल ‘वंदे मातरम’ के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराती है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकवाद और राजनीतिक विमर्श के इर्द-गिर्द के विवादों को भी सामने लाती है।
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