दिल्ली की धुंध में छिपी आवाज़: प्रदूषण की मार और नागरिकों का आक्रोश
रविवार की सुबह दिल्ली एक बार फिर घने कोहरे और प्रदूषण की चादर में लिपटी हुई थी। सुबह 9 बजे शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 268 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि, यह कल के 305 के मुकाबले एक राहत है और लगभग 24 दिनों बाद प्रदूषण के स्तर में आई यह पहली उल्लेखनीय गिरावट मानी जा रही है।
कहीं राहत, कहीं आफत:AQI की नब्ज़
इसके बावजूद, राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। शादिपुर का AQI 331, आरके पुरम 303 और जहांगीरपुरी 323 दर्ज किया गया, जो सभी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आते हैं। नेहरू नगर (316) और दिलशाद गार्डन (304) की हवा भी बेहद खराब है। वहीं, आनंद विहार (282) और पतपड़गंज (280) ‘खराब’ श्रेणी में रहे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में फरीदाबाद 174 पर रहा, जबकि नोएडा (266) और गाजियाबाद (260) भी ‘खराब’ श्रेणी में ही दर्ज किए गए।
मानदंडों की कसौटी पर दिल्ली की हवा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, AQI स्तर 0-50 ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 ‘गंभीर’ माना जाता है।
23 दिनों की लंबी धुंध: एक असहनीय सिलसिला
यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली में 29 नवंबर तक लगातार 23 दिनों तक AQI 300 से ऊपर रहा, जो 2019 के बाद की सबसे लंबी अवधि में से एक है।
सड़कों पर उतरी चिंता: जन-आंदोलन की आहट
इस बीच, खराब हवा और बढ़ती स्वास्थ्य चिंताओं के बीच दिल्ली के नागरिक समूह एक बार फिर सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। 30 नवंबर को जंतर-मंतर पर दोपहर 2 से 5 बजे तक प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की गई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए कहा गया है कि दिल्लीवासी “धूल में सांस ले रहे हैं, सूरज की रोशनी खो रहे हैं और शोर के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं,” इसलिए लोगों से इस महत्वपूर्ण पहल में शामिल होने का आह्वान किया गया है।
3 दिसंबर को बड़ा शक्ति प्रदर्शन: नागरिक एकजुटता
इसी कड़ी में, 3 दिसंबर को भी जंतर-मंतर पर एक बड़ा नागरिक प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। ‘माई राईट टू ब्रीथ’ और ‘वारियर्स मॉम्स’ जैसे कई सामाजिक संगठनों ने इसमें शामिल होने की पुष्टि की है। कांग्रेस समर्थित NSUI ने भी अपना समर्थन देने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन के माध्यम से बताया जाएगा कि दिल्ली अभी भी “खतरनाक” हवा में घुट रही है और ग्रैप (Graded Response Action Plan) जैसे अस्थायी उपाय हटने के बाद हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं।
जागरूकता की मशाल: नई चेतना की ओर
प्रदूषण के खिलाफ जन-जागरूकता बढ़ाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, 23 नवंबर की शाम को भी नागरिक इंडिया गेट पर जुटे थे। हालांकि, पुलिस द्वारा हटाए जाने के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन तमाम घटनाओं ने दिल्ली की हवा और नागरिक असंतोष, दोनों पर चल रही बहस को एक नया आयाम दिया है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
