दिल्ली के लाल किला धमाके की आंच अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक: जव्वाद अहमद सिद्दीकी की पृष्ठभूमि की पड़ताल
दिल्ली के लाल किले के पास हुए भयावह धमाके ने जहां देश को झकझोर कर रख दिया है, वहीं जांच एजेंसियों की रफ्तार भी तेज हो गई है। इस जांच के दायरे में अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर और फाउंडिंग ट्रस्टी जव्वाद अहमद सिद्दीकी का नाम भी आ गया है। फरीदाबाद में पकड़े गए कथित “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” से जुड़े तीन डॉक्टर – डॉ. उमर नबी, डॉ. मुअज्जमिल शकील और शाहीन शाहिद – अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत पाए गए, जिसने एजेंसियों का ध्यान इस विश्वविद्यालय और इससे जुड़े लोगों की ओर खींचा।
एक जटिल जाल: अल-फलाह का कनेक्शन
प्रारंभिक शक गहराने के बाद, एजेंसियों ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों पर और गहराई से नजर डालना शुरू कर दिया है। जव्वाद सिद्दीकी, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और देव अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, एक स्थापित पृष्ठभूमि रखते हैं। इंदौर पुलिस के अनुसार, उनके पिता मोहम्मद हमीद सिद्दीकी महू के कायस्थ मोहल्ले में ‘सेहर काज़ी’ के पद पर रहे हैं। स्थानीय पुलिस अब उनके पुराने संपर्कों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
18 सितंबर 1992 को अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स में डायरेक्टर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले सिद्दीकी का 1995 में स्थापित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो आज यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कई संस्थानों का संचालन करता है। फरीदाबाद के धौज गांव में लगभग 78 एकड़ में फैला विश्वविद्यालय का मुख्य कैंपस, सिद्दीकी के व्यापक प्रभाव का एक प्रमाण है। इसके अलावा, सिद्दीकी लगभग 15 कंपनियों से भी जुड़े हुए हैं, जो शिक्षा, सॉफ्टवेयर, कृषि कारोबार और रिसर्च जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई कंपनियों का रजिस्टर्ड पता जामिया नगर के एक ही स्थान पर है, जिसने उनके कारोबारी नेटवर्क की जटिलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्वविद्यालय का अपना पक्ष
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद को अलग दिखाने की कोशिश की है। यूनिवर्सिटी के लीगल और फाइनेंस अधिकारी मोहम्मद रज़ी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें इन डॉक्टरों की विश्वविद्यालय के बाहर की गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। उनका यह भी कहना है कि इस मामले से विश्वविद्यालय के मेहनती विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अतीत के पन्ने: धोखाधड़ी के आरोप और जेल
जव्वाद सिद्दीकी का पिछला रिकॉर्ड भी अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। वर्ष 2000 में, दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में उन पर और उनके कुछ साथियों पर निवेशकों को जाली शेयरों के जरिए ठगने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले में लगभग 7.5 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का उल्लेख था। सिद्दीकी को 2001 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने तीन साल से ज्यादा समय तिहाड़ जेल में बिताया था। उनकी जमानत दिल्ली हाई कोर्ट ने 2003 में खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में 2004 में उन्हें पीड़ितों को पैसे लौटाने की शर्त पर जमानत मिल गई थी। कई शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम परिवारों से थे, जिन्हें कथित ‘हलाल’ निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया था।
सरकारी कार्रवाई और जारी जांच
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, सरकार ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खातों की फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं। ईडी समेत कई एजेंसियां ट्रस्ट और उससे जुड़ी कंपनियों के फंड के रास्तों की जांच कर रही हैं। कई कंपनियों के निष्क्रिय हो जाने और कुछ के सॉफ्टवेयर, मेडिकल रिसर्च, इंजीनियरिंग, ब्रॉडकास्टिंग और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में पहले सक्रिय रहने की जानकारी भी सामने आई है।
जामिया नगर स्थित यूनिवर्सिटी कार्यालय के कर्मचारियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय का लाल किला धमाके से जुड़े गिरफ्तार डॉक्टरों से कोई औपचारिक संबंध नहीं है। जांच एजेंसियां फिलहाल सभी उपलब्ध कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या विश्वविद्यालय या उससे जुड़े किसी संस्थान की गतिविधियों का इस पूरे नेटवर्क से कोई गहरा रिश्ता रहा है। इस दिशा में पूछताछ और दस्तावेज़ों की छानबीन जारी है।
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