दिल्ली दम घुट रही: ज़हरीली हवा का कहर जारी, AQI ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में
दिल्ली में प्रदूषण का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अभी भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, जिससे निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह आनंद विहार में AQI 383 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब है। इस इलाके में स्मॉग की मोटी परत ने दृश्यता को काफी कम कर दिया है। गाज़ीपुर में भी AQI 383 दर्ज किया गया, जहाँ ज़हरीले स्मॉग ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। अक्षरधाम मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी AQI 383 से प्रभावित है, जबकि ITO क्षेत्र में AQI 331 दर्ज किया गया।
इंडिया गेट और कर्तव्य पथ भी प्रदूषण की मार झेल रहे
देश के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों में से एक, इंडिया गेट और कर्तव्य पथ भी ज़हरीले स्मॉग की चादर से ढके हुए हैं। CPCB के अनुसार, इन इलाकों में AQI 312 है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
विभिन्न इलाकों में AQI की स्थिति:
- AIIMS: 277
- आनंद विहार: 383
- गाज़ीपुर: 383
AQI का वर्गीकरण: CPCB के मानकों के अनुसार, 0-50 के बीच AQI ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’, और 401-500 ‘गंभीर’ माना जाता है।
संसद में दिल्ली प्रदूषण का मुद्दा
सोमवार से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में दिल्ली की गिरती वायु गुणवत्ता का मुद्दा छाया रहने की उम्मीद है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस स्थिति को ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि दिल्ली के बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “यह एक शर्मनाक स्थिति है। यह हमारे देश की राजधानी है। हमें अपने राजनीतिक मतभेदों को अलग रखना चाहिए, और कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए। हम अपने बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? एक अध्ययन के अनुसार, आज 22 लाख बच्चे ऐसे हैं जिनके फेफड़ों को स्थायी नुकसान हुआ है। बुजुर्ग, अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग परेशान हैं। अस्पताल सांस की समस्या वाले लोगों से भरे हुए हैं। हम बैठकर कुछ न करें, यह कैसे हो सकता है?… यदि सरकार ऐसा करती है तो हम उनका समर्थन करने के लिए यहां हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”
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