श्रीनगर में नौगाम पुलिस स्टेशन में भीषण विस्फोट, 9 की मौत, 25 घायल
श्रीनगर: शुक्रवार देर रात नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए एक भयानक विस्फोट ने इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक घटना में कम से कम नौ लोगों की जान चली गई, जबकि 25 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह विनाशकारी विस्फोट उस समय हुआ जब फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल मामले में हाल ही में ज़ब्त की गई भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री से नमूने निकाले जा रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और इलाके के सीसीटीवी फुटेज ने घटना की भयावहता को बयां किया। फुटेज में देखा जा सकता है कि विस्फोट ने इमारत को हिलाकर रख दिया, और हवा में आग की लपटें और घना काला धुआँ फैल गया।
कई पुलिसकर्मी और फोरेंसिक अधिकारी हताहत:
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार देर रात हुए इस विस्फोट में नौ लोगों की मृत्यु हो गई और 27 अन्य घायल हुए। घायलों में ज़्यादातर पुलिसकर्मी और फोरेंसिक अधिकारी शामिल हैं, जो इस खतरनाक काम में लगे हुए थे। विस्फोट स्थल से अब तक आठ शव बरामद किए जा चुके हैं, और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घायलों को श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
फरीदाबाद से लाई गई विस्फोटक सामग्री का नमूना लेना बना मौत का कारण:
यह हृदयविदारक घटना तब घटित हुई जब पुलिसकर्मी हरियाणा के फरीदाबाद से लाई गई विस्फोटक सामग्री से नमूने ले रहे थे। यह वही विस्फोटक सामग्री थी जो गिरफ्तार चिकित्सक मुजम्मिल गनई के किराए के आवास से बरामद की गई 360 किलोग्राम विस्फोटक का हिस्सा थी। मामले की जारी जांच के तहत, इस सामग्री के नमूने लिए जा रहे थे, जो एक भयानक चूक साबित हुई। शवों को श्रीनगर स्थित पुलिस नियंत्रण कक्ष ले जाया गया है।
24 पुलिसकर्मी और 3 नागरिक घायल:
अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 24 पुलिसकर्मियों और तीन आम नागरिकों को शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। विस्फोट के बाद, रात के सन्नाटे को एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों के सायरन की आवाज़ों ने चीर दिया, जब घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लगातार हुए छोटे-छोटे विस्फोटों के कारण बम निरोधक दस्ते के लिए बचाव अभियान चलाना और भी मुश्किल हो गया।
आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश और जांच:
बरामद विस्फोटकों में से कुछ को पुलिस की फोरेंसिक प्रयोगशाला में रखा गया था, जबकि 360 किलोग्राम विस्फोटक का बड़ा हिस्सा पुलिस थाने में ही रखा गया था, जहाँ आतंकवादी मॉड्यूल के संबंध में प्राथमिक मामला दर्ज किया गया था। इस पूरे मॉड्यूल का पर्दाफाश अक्टूबर के मध्य में तब हुआ था जब नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर पुलिस और सुरक्षा बलों को धमकी देने वाले पोस्टर दिखाई दिए थे।
श्रीनगर पुलिस ने इस घटना को एक गंभीर खतरा मानते हुए 19 अक्टूबर को मामला दर्ज किया था और एक विशेष जांच दल का गठन किया था। सीसीटीवी फुटेज के सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद, पुलिस तीन संदिग्धों – आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद – की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने में सफल रही। इन तीनों के खिलाफ पथराव के मामले दर्ज थे और उन्हें पोस्टर चिपकाते हुए भी देखा गया था।
चिकित्सकों की भूमिका और फरीदाबाद कनेक्शन:
पूछताछ के दौरान, शोपियां के एक पूर्व पैरा-मेडिक, जो अब मौलवी हैं, इरफान अहमद की गिरफ्तारी हुई। माना जाता है कि उसने पोस्टर मुहैया कराए थे और अपनी चिकित्सा समुदाय तक आसान पहुँच का फायदा उठाकर चिकित्सकों को कट्टरपंथी बनाया था। इसी सुराग के आधार पर, श्रीनगर पुलिस फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय तक पहुँचने में कामयाब रही, जहाँ से उसने डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया। इसी विश्वविद्यालय से अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे रसायनों का विशाल भंडार जब्त किया गया था।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस पूरे मॉड्यूल का संचालन चिकित्सकों की एक तिकड़ी द्वारा किया जा रहा था – मुजम्मिल गनई (गिरफ्तार), उमर नबी (10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोट में शामिल कार का चालक) और मुजफ्फर राठेर (फरार)। फरार डॉ. मुजफ्फर राठेर के भाई, डॉ. अदील राठेर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। गिरफ्तार किए गए अदील राठेर के पास से एक एके-56 राइफल भी जब्त की गई है।
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