JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ झारखंड का छात्र आंदोलन लगातार तेज़ हो रहा है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि विधानसभा सत्र, राहुल गांधी का समर्थन और आज प्रस्तावित विधानसभा मार्च इस आंदोलन को नए मोड़ पर ले जा सकते हैं।
सरकार और छात्रों के बीच अब भी नहीं बनी बात
गुरुवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि छात्र प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह तैयार है, लेकिन बैठक का समय और स्थान तय नहीं हो पाने के कारण वार्ता टल गई। छात्रों का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और औपचारिक होनी चाहिए। सरकार की ओर से भी अब तक नई बैठक का कोई आधिकारिक समय घोषित नहीं किया गया है।
बारिश के बीच भी जारी है आंदोलन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और भूख हड़ताल लगातार जारी है। लगातार हो रही बारिश भी प्रदर्शनकारियों के हौसले को कम नहीं कर सकी है। छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने छात्रों से की बातचीत
आंदोलन को गुरुवार देर रात बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्रों की मांगें सुनीं और कहा कि सरकारों को युवाओं की आवाज़ सुननी चाहिए तथा शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी के इस समर्थन से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा मिली है।
आज निकलेगा विधानसभा मार्च
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आज दोपहर 12 बजे बिरसा चौक से झारखंड विधानसभा तक मार्च का आह्वान किया है। आयोजकों के अनुसार, इसमें बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने की संभावना है। छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि फिलहाल संगठन सरकार की ओर से वार्ता का आधिकारिक निमंत्रण मिलने का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि बातचीत की तारीख और समय सरकार को ही तय करना होगा।
आज का दिन क्यों है महत्वपूर्ण?
आज झारखंड विधानसभा सत्र का दूसरा दिन भी है। ऐसे में विपक्ष JPSC-JSSC भर्ती विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। यदि आज सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होती है तो आंदोलन को नई दिशा मिल सकती है। वहीं, वार्ता में और देरी होने पर आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
झारखंड का छात्र आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार संवाद का रास्ता चुनती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है।
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