प्रस्तावित शीर्षक: गाजा में शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी अब भारत के कंधों पर? जानें ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का पूरा गणित

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गाजा पर शांति मिशन में भारत की एंट्री! ट्रंप का PM मोदी को न्योता, जानें ‘Board of Peace’ का पूरा प्लान | India gaza peace mission trump invites pm modi board of peace

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🌍 वैश्विक मंच पर भारत की नई भूमिका: गाजा शांति मिशन में मोदी सरकार की ‘पीसमेकर’ एंट्री!

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | पल्लवी कुमारी
प्रकाशित: रविवार, 18 जनवरी 2026, 22:32 [IST]

India Gaza Peace Mission: गाजा संकट को लेकर अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक पहल अब नया मोड़ ले चुकी है। इस उभरते वैश्विक समीकरण में भारत की शक्तिशाली एंट्री हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए बनाए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में भारत को एक प्रमुख सदस्य के तौर पर शामिल होने का न्योता भेजा है। यह वही मंच है जिसे ट्रंप प्रशासन इजरायल-हमास युद्ध को स्थायी तौर पर खत्म करने और गाजा के पुनर्निर्माण की कुंजी मान रहा है। खास बात यह है कि इस बोर्ड में भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी जगह दी गई है, जो इसे और भी रोचक बना देता है।

गाजा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: क्या है इसका खास मिशन?

ट्रंप ने इसे युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के रूप में पेश किया है। इसका लक्ष्य सिर्फ गोलीबारी रोकना नहीं, बल्कि गाजा को फिर से बसाना है। इस बोर्ड की निगरानी में एक तकनीकी समिति काम करेगी, जो गाजा के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को संभालेगी। इसका मकसद बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करना, निवेश लाना और लंबे समय तक शांति सुनिश्चित करना है।

भारत को क्यों चुना गया?

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। दरअसल, भारत की छवि एक ‘संतुलित वैश्विक शक्ति’ की है, जो पश्चिम एशिया में किसी एक धड़े के बजाय स्थिरता और बातचीत पर जोर देता है। भारत ने पहले भी मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाई है, और यही वजह है कि अमेरिका उसे इस महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा बनाना चाहता है।

पाकिस्तान भी शामिल

भारत के न्योते के कुछ ही घंटों बाद, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भी पुष्टि की कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का आमंत्रण मिला है। इससे साफ है कि अमेरिका इस मंच को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देना चाहता है, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों तरह के देश साथ आएं।

ये देश और नेता भी होंगे शामिल

यह मंच केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नेताओं को भी न्योता दिए जाने की खबर है।

मेंबरशिप की ‘प्राइस टैग’

ट्रंप प्रशासन की ओर से भेजे गए ड्राफ्ट चार्टर के मुताबिक, अगर कोई देश तीन साल से ज्यादा समय तक स्थायी सदस्य बनना चाहता है, तो उसे 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। हालांकि, तीन साल की सदस्यता के लिए किसी तरह की वित्तीय प्रतिबद्धता जरूरी नहीं होगी।

बोर्ड की कमान कौन संभालेगा?

ट्रंप ने ऐलान किया है कि इस बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, उनके दामाद जेरेड कुश्नर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष अजय बंगा शामिल होंगे। यही टीम गाजा के लिए बनाए जाने वाले प्रशासनिक ढांचे पर नजर रखेगी।

आगे क्या?

ट्रंप की योजना के मुताबिक गाजा को फिर से रहने लायक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाया जाएगा। युद्धविराम के बावजूद गाजा में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ऐसे में भारत जैसे देशों की भागीदारी इस पहल को कितना असरदार बनाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।


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English Summary:
India gaza peace mission trump invites pm modi board of peace. गाजा में शांति के लिए अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को जगह मिली है। डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को आमंत्रण दिया है, जबकि पाकिस्तान भी इसमें शामिल होगा।


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