आर्थिक दबाव से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल की वापसी की तैयारी तेज हो गई है। सरकार ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी के लिए एजेंट नियुक्त करने की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। दिवाली के आसपास पहला बड़ा ड्रॉ होने की संभावना है, लेकिन अंतिम फैसला औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद होगा।
27 साल बाद फिर खुला लॉटरी का रास्ता
हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राज्य सरकार ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए Sole Selling Agent नियुक्त करने को ई-टेंडर जारी किया है। हालांकि, अभी लॉटरी शुरू नहीं हुई है। पहले एजेंसी का चयन होगा और उसके बाद जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
दिवाली पर हो सकता है पहला बड़ा ड्रॉ
सरकार की योजना है कि टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हुई तो दिवाली के आसपास पहला बड़ा लॉटरी ड्रॉ आयोजित किया जा सकता है। टिकट ऑफलाइन बिक्री केंद्रों के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे व्यवस्था को अधिक व्यापक और डिजिटल बनाने की कोशिश होगी।
सरकार को 50 करोड़ रुपये सालाना उम्मीद
लॉटरी वापस लाने के पीछे सबसे बड़ा कारण राजस्व बढ़ाना माना जा रहा है। सरकार को इससे करीब 50 करोड़ रुपये सालाना आय की उम्मीद है। आर्थिक दबाव और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बीच हिमाचल सरकार नए राजस्व स्रोत तलाश रही है। पंजाब और केरल जैसे राज्यों की लॉटरी व्यवस्था को भी उदाहरण के तौर पर देखा गया है।
एजेंसी पर बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी
टेंडर में चयनित एजेंसी को सालाना 10 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस देनी होगी, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है। इसके अलावा कम से कम 6 करोड़ रुपये का Minimum Guaranteed Amount और कुल कारोबार पर न्यूनतम 2 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की बोली देनी होगी। एजेंसी को 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी भी जमा करनी होगी।
डिजिटल रिकॉर्ड से पारदर्शिता पर जोर
नई व्यवस्था में बिक्री, भुगतान, वितरण और वित्तीय लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया है। चयनित एजेंसी को Special Purpose Vehicle यानी SPV बनाना होगा, ताकि लेन-देन का ऑडिट ट्रेल उपलब्ध रहे। राज्य ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम-2026 भी तैयार किए हैं।
समर्थन से ज्यादा सवालों में फैसला
हिमाचल में सरकारी लॉटरी वर्ष 1999 में बंद कर दी गई थी। उस समय सामाजिक नुकसान, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी जैसी शिकायतें इसके खिलाफ बड़ी वजह बनी थीं। अब सरकार के फैसले पर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं। अनुराग ठाकुर ने टेंडर वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि लॉटरी से मिलने वाली आय वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकती।
कमाई का रास्ता या नई चुनौती?
हिमाचल सरकार के सामने चुनौती केवल अतिरिक्त राजस्व जुटाने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की भी है जिस पर जनता भरोसा कर सके। यदि लॉटरी शुरू होती है तो पारदर्शिता, सख्त निगरानी और जिम्मेदार संचालन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। आखिरकार सवाल सिर्फ 50 करोड़ की कमाई का नहीं, बल्कि उसके सामाजिक असर का भी है।
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