हरिद्वार में संतों के समागम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को विकास की गति में बाधा बताते हुए संत समाज से इस संवैधानिक सुधार के पक्ष में जनजागरूकता बढ़ाने की अपील की।
हरिद्वार में शिवराज ने रखा अपना पक्ष
हरिद्वार में संत समाज की बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास और जनसेवा की गति को प्रभावित करते हैं। उनके मुताबिक चुनावों में समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
मंच पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे और उन्होंने भी इस पहल के प्रति समर्थन जताया।
विकसित भारत से जोड़ा ‘एक देश, एक चुनाव’
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वन नेशन वन इलेक्शन जरूरी है। उन्होंने संत समुदाय से अपील की कि वह इस संवैधानिक सुधार के समर्थन में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने में सहयोग करे।
उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में बार-बार प्रशासनिक मशीनरी के व्यस्त होने से विकास कार्यों की निरंतरता प्रभावित होती है।
2029 में एक साथ चुनाव की चर्चा तेज
वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर 2029 की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज है। उपलब्ध राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, लोकसभा के साथ 22 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, ऐसा करने के लिए कई राज्यों के चुनावी चक्र में बदलाव करना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कुछ अन्य राज्यों में चुनाव 2028 में प्रस्तावित हैं।
भारत में पहले भी साथ हुए हैं चुनाव
एक देश, एक चुनाव भारत के लिए पूरी तरह नया विचार नहीं है। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव बड़े पैमाने पर एक साथ हुए थे। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण चुनावी चक्र अलग-अलग हो गया।
अब इसी व्यवस्था को दोबारा लागू करने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
JPC में भी जारी है चर्चा
वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC में भी विचार-विमर्श चल रहा है। बैठक में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद शामिल हैं।
JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो बदलाव संभव है। उनके अनुसार उद्देश्य केवल चुनावों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
सामने होगी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती
वन नेशन वन इलेक्शन लागू करना केवल चुनावी तारीखें एक करने का मामला नहीं है। इसके लिए संवैधानिक और कानूनी बदलावों के साथ राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति भी जरूरी होगी।
शिवराज का बयान इस बहस को फिर राजनीतिक मंच के केंद्र में ले आया है। अब असली सवाल यही है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार नारे से आगे बढ़कर 2029 तक वास्तविक चुनावी व्यवस्था में बदल पाएगा या नहीं।
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