एक सशक्त भारत: वैश्विक स्थिरता का आधार
नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘चाणक्य रक्षा संवाद’ में अपने संबोधन के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया कि एक स्थिर भारत, वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत, केंद्र सरकार एक ऐसे रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है जो न केवल नवाचार को बढ़ावा देता है, बल्कि उद्योग को सक्रिय समर्थन भी प्रदान करता है और देश की बाहरी निर्भरता को कम करने में सहायक है।
मंत्री महोदय ने कहा कि जब भारत शक्ति, सुरक्षा और विकास के मार्ग पर अग्रसर होता है, तो इसका लाभ पूरे विश्व को अनेक रूपों में मिलता है। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कई देशों के लिए समावेशी, पारदर्शी और सुरक्षित शासन के मॉडल के रूप में एक आदर्श प्रस्तुत करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और अंतरिक्ष जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रति भारत का नैतिक दृष्टिकोण, ऐसे मानकों की स्थापना करता है जिन पर अन्य देश भी ध्यान केंद्रित करते हैं। शांति, जलवायु उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के प्रति हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को एक नई नैतिक शक्ति प्रदान करती है। संक्षेप में, एक सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत विश्व से कटा हुआ नहीं है, बल्कि वह अच्छाई की एक शक्ति के रूप में उभरा है, जो वैश्विक शांति और मानव कल्याण को सुदृढ़ करने में योगदान दे रहा है।
इस सकारात्मक प्रभाव को स्थायी शक्ति में बदलने के लिए, सरकार केंद्रित सुधारों के माध्यम से राष्ट्रीय क्षमता को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा और संपर्क दोनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीमा और समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। नए प्लेटफ़ॉर्म, प्रौद्योगिकी और संरचनाओं के माध्यम से भारतीय सेनाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। साथ ही, खरीद प्रक्रियाओं में सुधार किया जा रहा है ताकि गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। ‘आत्मनिर्भरता’ के सिद्धांत पर चलते हुए, एक ऐसा रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करता है, उद्योग का समर्थन करता है और बाहरी निर्भरता को कम करता है।
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार स्टार्टअप्स, गहन तकनीकी क्षमताओं और अनुसंधान एवं विकास में भारी निवेश कर रही है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्रों को आकार देंगे। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सैनिकों, पूर्व-सैनिकों और उनके परिवारों के हित और कल्याण निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में रहें। ये सभी प्रयास एक-दूसरे से अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि मिलकर भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा और विकास की नींव रख रहे हैं। इन प्रयासों को प्रभावी बनाए रखने के लिए, ‘चाणक्य रक्षा संवाद’ जैसे मंच विचार-विमर्श और सुधार के लिए आवश्यक अवसर प्रदान करते हैं।
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