भारत-पाक: गुप्त समझौते का चौथा अध्याय

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ऑपरेशन सिंदूर: जब सुरक्षा की सीमाएं हवा में खिंच गईं और NOTAM का महत्व बढ़ा

7 मई 2025 को भारत द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” ने न केवल पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में फैले नौ आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया, बल्कि इसने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण ‘नोटिस टू एयर मिशन’ (NOTAM) की भूमिका को भी अभूतपूर्व रूप से उजागर किया। यह ऑपरेशन, जिसे भारतीय निवारक और हवाई-संचालन रुख में एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचे के समर्थन के लिए दंडित करना था, न कि उसके सैन्य प्रतिष्ठानों को।

NOTAMs: क्यों बने संकट के इस दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण?

ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य गतिविधियों के मद्देनज़र, NOTAMs का महत्व कई कारणों से और भी बढ़ गया:

  • हवाई क्षेत्र पर बदलता नियंत्रण: जब कोई देश सैन्य कार्रवाई करता है या जवाबी कार्रवाई की आशंका करता है, तो सीमावर्ती या विवादित हवाई क्षेत्रों में उड़ानें अस्थायी रूप से प्रतिबंधित या परिवर्तित की जा सकती हैं। NOTAMs इस तरह के बदलावों की सूचना देते हैं। उदाहरण के लिए, संकट की घड़ी में पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र के कुछ हिस्सों को, विशेषकर भारतीय एयरलाइनों के लिए, बंद कर दिया था। पायलटों, एयरलाइनों और नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के लिए NOTAMs पर निरंतर और अत्यंत सतर्कता से नज़र रखना अनिवार्य हो जाता है, क्योंकि इसमें बहुत कम समय में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं।
  • खतरों से बचने का अचूक मार्गदर्शक: सैन्य अभियानों में मिसाइल परीक्षण, विमान-रोधी गतिविधियाँ, अस्थायी उड़ान प्रतिबंध (TFR), या ड्रोन/मिसाइल प्रक्षेपण जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। NOTAMs इन संभावित खतरों और परिवर्तित हवाई क्षेत्र की स्थिति के बारे में सटीक चेतावनी प्रदान करते हैं, जिससे नागरिक उड्डयन सुरक्षित रह सके।
  • एफआईआर और साझा हवाई क्षेत्र में तालमेल का नया दौर: भारत और पाकिस्तान के बीच, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में, नागरिक उड़ानों को सैन्य या प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रखने के लिए दिल्ली और कराची एफआईआर (Flight Information Region) के बीच समन्वय आवश्यक है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद, इस तरह के समन्वय पर और भी अधिक दबाव आ गया है। अचानक जारी होने वाले NOTAMs से सुरक्षित गलियारों में अप्रत्याशित बदलाव की संभावनाएँ बढ़ गई हैं, जिससे इन दोनों देशों के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के बीच एक सहज और सुरक्षित तालमेल बनाए रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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