नौसेना के भविष्य पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान का उद्गार: महासागरों में भारत का भाग्य, तकनीक और एकीकरण ही सफलता की कुंजी
भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला में शनिवार को एक गौरवशाली क्षण था, जहाँ नवनियुक्त नौसेना अधिकारियों ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली। इस अवसर पर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने नवोदित अधिकारियों को संबोधित करते हुए भारतीय नौसेना के भविष्य और उसकी निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।
महासागरों में भारत का भविष्य, नौसेना के हाथ में
जनरल चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत इस महत्वपूर्ण तथ्य से की कि भारत एक महाद्वीपीय और एक समुद्री शक्ति है। उन्होंने कहा, “मेरा यह विश्वास हमेशा से रहा है और आज भी दृढ़ है कि भारत का अंतिम भाग्य महासागरों में ही निहित है। और इस भाग्य को सुरक्षित करने में, भारतीय नौसेना एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।” यह कथन भारतीय नौसेना के महत्व को रेखांकित करता है, जो न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि राष्ट्रीय हितों को भी सुरक्षित रखती है।
पेशेवर उत्कृष्टता: अक्षमता की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है
नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए, सीडीएस ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सत्य का स्मरण कराया: “अक्षमता की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पेशेवर उत्कृष्टता केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक दायित्व है। “यह आपके लिए कोई विकल्प नहीं है। यह एक दायित्व है,” उन्होंने कहा। “पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूर्ण रखें ताकि शांति के समय आप तैयार रहें और युद्ध में आप विजयी हों।” यह सलाह न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तकनीक का बढ़ता वर्चस्व: भूगोल को पीछे छोड़ती सैन्य रणनीति
जनरल चौहान ने अपनी सेवा के शुरुआती दिनों की सैन्य रणनीति को याद करते हुए बताया कि तब भौगोलिक विचार प्रमुख थे। लेकिन आज, तकनीक ने इस परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। “जब मैं सेवा में शामिल हुआ था, तब सैन्य रणनीति मुख्यतः भौगोलिक विचारों से प्रेरित होती थी। आज, तकनीक ने भूगोल को पीछे छोड़ दिया है, जिससे यह कम प्रासंगिक हो गया है। अधिकांश सैन्य रणनीति, संचालन कला और यहाँ तक कि छोटी-छोटी रणनीतियों को भी तकनीक ही संचालित करती है।” उन्होंने नए अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने पूरे करियर में इस पर ध्यान केंद्रित करें।
एकीकरण और अंतर-संचालनीयता: भविष्य के युद्धों की नींव
आज के समय में, सशस्त्र बलों के बीच एकीकरण और अंतर-संचालनीयता को सीडीएस ने भविष्य के युद्धों में निर्णायक कारक बताया। “भविष्य के सभी युद्ध एकीकृत तरीके से लड़े जाएँगे। एकजुटता ही वह मंत्र है जो हम सभी को सफल बनाएगा। हम इसी के अनुरूप तीनों सेनाओं के बीच एकजुटता और एकीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।” यह रणनीति भारतीय सेना को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाती है।
पासिंग आउट परेड: नई पीढ़ी की राष्ट्र सेवा का आरंभ
इससे पहले, भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए), एझिमाला ने शरदकालीन सत्र के लिए अपनी पासिंग आउट परेड (पीओपी) का आयोजन किया। यह परेड कैडेटों के गहन और परिवर्तनकारी प्रशिक्षण के समापन का प्रतीक है, जो अब भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र विदेशी नौसेनाओं में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ देने के लिए तैयार हैं। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने परेड की समीक्षा की और इन भविष्य के नायकों को राष्ट्र की सेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।
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