अंतरिक्ष में भारत की जीत: ‘आसमान में अशोक चक्र, धरती पर भारत का परचम’

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अंतरिक्ष से अशोक चक्र, भारत का परचम विश्व पटल पर लहराने का उपहार

यहाँ दिया गया लेख आपके मूल पाठ और लंबाई को बनाए रखते हुए, एक नए, आकर्षक और रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है:

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक नया गौरव: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को ‘शौर्य चक्र’ की उपाधि

इंडियन एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन और भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इसका ऐलान किया गया। शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून में ‘एक्सियम-4’ (Axiom-4) मिशन के तहत इंटरनैशनल स्पेस सेंटर की ऐतिहासिक यात्रा की थी। शुभांशु 18 दिन इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर रहे, ये भारत के गगनयान मिशन के लिए भी अहम है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सशस्त्र बलों के 70 कर्मियों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है।

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शुभांशु शुक्ला का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का ऐतिहासिक मिशन

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। वे एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा थे, जिससे वे राकेश शर्मा के 1984 के मिशन के 41 साल बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए। शुक्ला ने अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए और जटिल वैज्ञानिक एवं तकनीकी अभियानों को अंजाम दिया, जो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। अंतरिक्ष में अपनी उपलब्धियों के अलावा, शुक्ला 2,000 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव वाले एक बेहद अनुभवी लड़ाकू पायलट हैं। उन्होंने Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32 सहित कई तरह के विमान उड़ाए हैं, जो भारतीय वायु सेना में उनके असाधारण पेशेवर रिकॉर्ड को दर्शाता है।

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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका

इस्राएल अंतरिक्ष सेवा (आईएसएस) में अपने प्रवास के दौरान, शुक्ला ने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों का नेतृत्व और समर्थन किया, जिनमें इसरो के लिए किए गए सात प्रयोग भी शामिल थे। ये अध्ययन अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य, पदार्थ विज्ञान और जैविक अनुसंधान पर केंद्रित थे, जिन्होंने भारत के आगामी गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन (जो 2027 में निर्धारित है) के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।


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