भारत-कनाडा संबंधों में नई आशा की किरण: जयशंकर-आनंद की मुलाकात से बढ़े आगे के कदम
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। इस महत्वपूर्ण बैठक में, जयशंकर ने कहा, “उच्चायुक्तों की नियुक्ति एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि हम संबंधों को फिर से मजबूत करने की ओर अग्रसर हैं। आज हमने इस दिशा में आगे के कदमों पर विस्तार से चर्चा की। मैं विदेश मंत्री आनंद का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हूँ।”
राजदूतों की वापसी: द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का संकेत
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में भारत ने दिनेश पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया है। पटनायक ने पिछले सप्ताह कनाडा की गवर्नर जनरल मैरी साइमन को अपने परिचय पत्र सौंपे, जिसके बाद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया गया। 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी पटनायक की नियुक्ति, पिछले महीने भारत और कनाडा द्वारा एक-दूसरे की राजधानियों में दूतों की नियुक्ति के साथ, 2023 में एक सिख अलगाववादी की हत्या के बाद आई खटास को दूर करने के प्रयासों का एक स्पष्ट संकेत है।
“खालिस्तानी दीवार” को गिराने की ओर बढ़ते कदम
पिछले साल जून में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के समकक्ष मार्क कार्नी के बीच जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई बातचीत ने भी संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए “रचनात्मक” कदम उठाने पर सहमति जताई थी, जिसमें आपसी राजधानियों में राजदूतों की शीघ्र वापसी भी शामिल थी। खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर हुए राजनयिक विवाद ने भारत-कनाडा संबंधों को अभूतपूर्व निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के आरोपों के बाद, दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस विवाद के चलते भारत ने अपने उच्चायुक्त सहित पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था, जिसके जवाब में भारत ने भी इतने ही कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था। हालांकि, अप्रैल में संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता कार्नी की जीत ने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विदेश मंत्री जयशंकर और अनीता आनंद की यह मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और सहयोग को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, और दोनों देश अब भविष्य में मजबूत और स्थिर साझेदारी की ओर बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।
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