गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों का ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ चरम पर है। जम्मू के बाहरी इलाकों से लेकर किश्तवाड़ और शोपियां तक सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जिसका स्पष्ट संदेश है: आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।
जम्मू के भाटिंडी, नारवाल और राजीव नगर में घर-घर तलाशी अभियान के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों और राजमार्गों पर चौकसी बढ़ाई गई है। पुलिस और केंद्रीय बलों ने कमर कस ली है, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी भी साजिश को पनपने का मौका न मिले।
किश्तवाड़ में मुठभेड़: शहीद जवान, बौखलाए आतंकी
ऊंचाई वाले जंगलों वाले किश्तवाड़ में हालात बेहद गंभीर हैं। चतरू क्षेत्र के सोनार और मंद्रल सिंहपोरा में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर सेना ने अतिरिक्त बल तैनात किया है। ‘ऑपरेशन त्राशी-एक’ के तहत जारी मुठभेड़ में एक वीर पैराट्रूपर शहीद हुआ और कई जवान घायल हुए, लेकिन सुरक्षा बलों ने मोर्चा नहीं छोड़ा।
आतंकियों ने छिपकर ग्रेनेड हमले किए और लगातार गोलीबारी की, लेकिन जवानों ने दबदबा बनाए रखा। मुठभेड़ स्थल के पास एक बड़े आतंकी ठिकाने का पता चलने से यह भी पुष्टि होती है कि आतंकी गहरी साजिश के साथ इस इलाके में जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे थे। खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि यहां दो से तीन सक्रिय आतंकी हैं जो सीमा पार बैठे आकाओं के संपर्क में हैं। दोबारा शुरू हुई गोलीबारी बताती है कि आतंकी घिर चुके हैं और बौखलाहट में हैं।
शोपियां में बड़ी साजिश नाकाम, 6 किलो का IED बरामद
दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सुरक्षा बलों की सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी टाल दी। अवनीरा गांव के एक बाग से लगभग 6 किलो वजनी आईईडी (IED) बरामद किया गया, जिसे बाद में नियंत्रित विस्फोट में नष्ट कर दिया गया। यह साफ है कि गणतंत्र दिवस से पहले आम नागरिकों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।
पत्रकारों के तलब होने पर विवाद
इस बीच, कश्मीर में कुछ पत्रकारों को पुलिस द्वारा तलब किए जाने पर बहस छिड़ गई है। कुछ संगठन इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का रुख स्पष्ट है: संवेदनशील माहौल में हर सूचना की जांच जरूरी है। जब आतंकवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा हो, तब अफवाह और अधूरी जानकारी भी खतरनाक हथियार बन सकती है।
राष्ट्रहित सर्वोपरि: नरमी नहीं, समझौता नहीं
यह कोई दो राय नहीं कि दशकों तक आतंकवाद ने इस क्षेत्र को लहूलुहान किया, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और आतंक के हर ठिकाने को मिट्टी में मिला देंगे।
कुछ लोग इन कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हैं और मानवाधिकार या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देते हैं। सवाल यह है कि जब निर्दोष नागरिकों की जान लेने के लिए आईईडी बागों में दफनाए जा रहे हों, तब चुप्पी क्यों साध ली जाती है? राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है और यह बात अब बिना किसी लाग-लपेट के कहनी होगी।
भारत ने स्पष्ट नीति अपनाई है: आतंकवाद और उससे जुड़े हर तंत्र को जड़ से खत्म किया जाएगा। कोई नरमी नहीं, कोई समझौता नहीं। यही आक्रामक और निर्णायक रुख आज की जरूरत है। गणतंत्र दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि उस संविधान का उत्सव है जिसे आतंकवादी ताकतें बार-बार चुनौती देती रही हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों का हर कदम देश के आम नागरिक को भरोसा देता है कि भारत झुकने वाला नहीं है।
बहरहाल, कश्मीर में शांति का रास्ता आतंक के सफाए से होकर ही जाता है। जो लोग भ्रम फैलाते हैं, उन्हें भी यह समझना होगा कि राष्ट्रहित से बड़ा कोई तर्क नहीं। आज का भारत जाग चुका है और आतंकवाद के विरुद्ध उसकी पहल न केवल सराहनीय है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी भी है।
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