
Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी महज एक उपवास नहीं, बल्कि वह कल्याणकारी और मोक्षदायिनी तिथि है जो भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवन के समस्त पापों, भय और नकारात्मक बाधाओं का नाश करती है। सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, इस पवित्र दिन पूरी श्रद्धा के साथ किया गया व्रत न केवल अकाल मृत्यु के संकट को टालता है, बल्कि दुर्भाग्य और पितृ दोष से भी मुक्ति दिलाता है। वर्ष 2026 में जया एकादशी का यह पावन पर्व 29 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त और तिथियां: कब रखें जया एकादशी का पावन व्रत?
- जया एकादशी व्रत तिथि: 29 जनवरी 2026, दिन गुरुवार
- एकादशी तिथि का शुभारंभ: 28 जनवरी 2026 (बुधवार) दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से
- एकादशी तिथि का समापन: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार) सुबह 11 बजकर 38 मिनट तक
- द्वादशी तिथि (पारण के दिन) की समाप्ति: 30 जनवरी 2026 को सुबह 09 बजकर 21 मिनट पर
- व्रत पारण का सर्वश्रेष्ठ समय: 30 जनवरी 2026 की सुबह 06 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक
पुण्य प्राप्ति के लिए एकादशी के दिन क्या करें?
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और शुद्ध व पीले वस्त्र धारण करें।
- सबसे पहले जगत के पालनहार भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा करें।
- इसके बाद शिव मंदिर जाकर महादेव का पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत फलदायी होता है।
- पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ नमः शिवाय” मंत्रों का निरंतर मानसिक जाप करें।
- अंत में घी का दीपक प्रज्वलित कर आरती करें और अपनी भूल-चूक के लिए प्रभु से क्षमा प्रार्थना करें।
जया एकादशी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में जागकर पवित्र स्नान करें और व्रत का दृढ़ संकल्प लें।
- भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की प्रतिमा को सुंदर चौकी पर स्थापित करें।
- पूरे दिन मन में सात्विकता और संयम का भाव बनाए रखें।
- गंगाजल से प्रभु का अभिषेक करें और उन्हें तुलसी दल अवश्य अर्पित करें (बिना तुलसी विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है)।
- पीले पुष्प, चंदन, अक्षत और धूप-दीप से भगवान का पूजन करें।
- जया एकादशी की व्रत कथा का श्रवण या वाचन श्रद्धापूर्वक करें।
- भोग में फल, मखाना या अन्य सात्विक वस्तुओं का अर्पण करें।
- द्वादशी तिथि को ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर ही व्रत का पारण करें।
सावधान! एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
- शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है।
- इस पवित्र तिथि पर तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, एक दिन पूर्व ही तोड़ कर रख लें।
- बाल, दाढ़ी या नाखून काटना इस दिन बेहद अशुभ माना गया है।
- निंदा, क्रोध, झूठ और कलह से दूर रहें; अपना मन केवल भक्ति में लगाएं।
- दिन में सोने और आलस्य करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
जया एकादशी के 5 अचूक और सिद्ध उपाय
1. गन्ने के रस से अभिषेक (आर्थिक लाभ हेतु):
गन्ने के रस को माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर गन्ने का रस अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है और धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं।
2. काले तिल का अर्पण (शनि दोष निवारण):
माघ के महीने में तिल का दान और उपयोग विशेष है। जया एकादशी पर शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं।
3. केसर मिश्रित दूध (व्यापार में उन्नति):
यदि व्यापार में घाटा हो रहा है, तो महादेव को केसर मिला हुआ दूध अर्पित करें। इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और कारोबार में वृद्धि होती है।
4. बिल्व पत्र पर ‘ॐ’ (सुख-शांति के लिए):
तीन पत्तों वाले बेलपत्र पर चंदन से ‘ॐ’ लिखकर महादेव को अर्पित करने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
5. अक्षत से धन लाभ:
पूजा में शिवलिंग पर बिना टूटे हुए चावल (अक्षत) चढ़ाएं। यह छोटा सा उपाय आर्थिक स्थिरता लाता है और आकस्मिक धन लाभ के योग बनाता है।
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 वर्षों का गहन अनुभव
संपर्क: +91 8620920581
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