कर्नाटक के राज्यपाल थवरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया है, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है। इस मामले पर राज्य सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है और राज्यपाल से बातचीत करने का फैसला किया है।
हालांकि इस इनकार के पीछे अधिकारिक कारण अभी अज्ञात हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो राज्यपाल के भाषण में केंद्र सरकार का जिक्र मुख्य वजह हो सकती है। सरकार की ओर से कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस मसले पर चर्चा के लिए राजभवन पहुंचेगा।
बता दें कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी गैर-बीजेपी सरकारों और उनके राज्यपालों के बीच ठीक इसी तरह की खटपट देखने को मिली है।
वहीं, कर्नाटक विधानसभा का यह सत्र (22 से 31 जनवरी) पहले से ही हंगामेदार रहने के आसार हैं। इसकी वजह कांग्रेस सरकार का वह प्रस्ताव है, जिसमें केंद्र के फैसले के खिलाफ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बहाल करने की मांग उठाई जा रही है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने MGNREGA को खत्म कर दिया है और इसकी जगह ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ [VB-GRAME] अधिनियम लाया है। कर्नाटक कैबिनेट ने इस नए कानून को मानने से इनकार कर दिया है और इसे कानूनी तौर पर चुनौती देने की तैयारी कर रही है। यह मामला अब कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी “MGNREGA बचाओ” अभियान का भी हिस्सा बन गया है, जिससे आने वाले सत्र में तीखी बहस की उम्मीद है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
