करूर भगदड़: एआईएडीएमके ने द्रमुक सरकार पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री के बयान को दी चुनौती
तमिलनाडु के करूर में हुई दुखद भगदड़ घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस हादसे पर विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा दिए गए बयान पर विपक्ष के नेता और अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने तीखा प्रहार किया है। ईपीएस ने द्रमुक सरकार पर एहतियाती कदम उठाने में विफलता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के दावों पर भी सवाल उठाए हैं।
पुलिसबल की तैनाती पर विवाद
मुख्यमंत्री स्टालिन ने जहां दावा किया कि घटना के समय 606 पुलिस अधिकारी ड्यूटी पर थे, वहीं ईपीएस ने पुलिस सूत्रों का हवाला देते हुए इस संख्या को 500 बताया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने 600 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की बात कही, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार, वास्तव में केवल 500 ही ड्यूटी पर थे। मुख्यमंत्री के बयान और पुलिस के बयानों में यह स्पष्ट अंतर है।” ईपीएस ने इस विसंगति को करूर भगदड़ में हुई मौतों के लिए सरकार की लापवाही का प्रमाण बताया।
लापरवाही का आरोप और गहराता विवाद
पलानीस्वामी ने 41 लोगों की जान लेने वाली इस “बेहद दुखद और पीड़ादायक” घटना पर एआईएडीएमके की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को तमिलगा वेत्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय की जनसभा में भारी भीड़ जुटने की पूरी जानकारी थी। उनके अनुसार, यदि पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई होती, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था। उन्होंने याद दिलाया कि टीवीके नेता पहले ही चार जिलों में सफल जनसम्पर्क सभाएं कर चुके थे और उन आयोजनों में उमड़ी भीड़ से सरकार और पुलिस अच्छी तरह वाकिफ थे।
राजनीतिक नियुक्तियों पर भी सवाल
एआईएडीएमके महासचिव ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जब एआईएडीएमके ने वेलुचामिपुरम में सभा करने की अनुमति मांगी थी, तो उन्हें जवाब मिला कि वह इलाका व्यस्त है और इसलिए उपयुक्त नहीं है। इसके विपरीत, टीवीके को वही स्थान आवंटित किया गया। ईपीएस ने संकेत दिया कि लोगों का मानना है कि यह एक “राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित जानबूझकर किया गया कदम” था।
मुख्यमंत्री का पलटवार
इस प्रतिक्रिया में, मुख्यमंत्री स्टालिन ने ईपीएस के बयानों को टीवीके को विपक्षी गठबंधन में शामिल करने की रणनीति करार दिया। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से करूर भगदड़ के पीछे की सच्चाई को उजागर करने की दिशा में और अधिक राजनीतिक बहस और जांच को जन्म देगा।
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