संसद में लगातार जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहली बार खुलकर मीडिया के सामने आए। उन्होंने विपक्ष को चर्चा की खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष तय करे कि उसे बहस चाहिए या सदन में हंगामा।
पहली बार मीडिया के सामने आए अमित शाह
संसद सत्र के दौरान जारी हंगामे के बीच अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह सत्र शुरू होने के बाद से नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने चैंबर में मौजूद रहते हैं।
शाह ने कहा कि उनके बारे में ‘लापता’ और ‘भगोड़े’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि वह लगातार संसद में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, अगर विपक्ष सदन को चलने नहीं देगा तो चर्चा कैसे हो पाएगी?
सरकार हर चर्चा के लिए तैयार
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार NEET प्रोटेस्ट समेत उन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, जिनकी मांग विपक्ष कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
शाह ने कहा कि चर्चा के लिए समय तय करने और विपक्ष को तैयारी करने का अवसर देने पर भी सरकार सहमत है। उनका कहना था कि सरकार को किसी भी सवाल का जवाब देने में कोई आपत्ति नहीं है।
24 घंटे में चर्चा का प्रस्ताव
अमित शाह ने विपक्ष के सामने एक स्पष्ट प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष दोपहर 3 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दे और सरकार 3 बजे से अगले दिन 3 बजे तक सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि वह खुद सदन में बैठकर सभी नेताओं की बात सुनेंगे और उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का जवाब देंगे। शाह के इस बयान ने संसद में बहस बनाम हंगामे की राजनीति को फिर केंद्र में ला दिया है।
‘जनता तय करे कौन भाग रहा है’
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को पलटते हुए कहा कि अब जनता को तय करने देना चाहिए कि चर्चा से कौन बच रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
शाह ने यह भी कहा कि वह इस सवाल पर भी बात करने के लिए तैयार हैं कि विपक्ष आखिर चर्चा क्यों नहीं चाहता। उनका संदेश साफ था—सरकार सदन में जवाब देने के लिए तैयार है, अब विपक्ष को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
संसद में गतिरोध बना सबसे बड़ा सवाल
संसद लोकतांत्रिक बहस का सबसे बड़ा मंच है। ऐसे में लगातार हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित होना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक सवाल खड़े करता है।
विपक्ष अपनी मांगों और मुद्दों को सदन में उठाना चाहता है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है। अब देखना होगा कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज तक पहुंचते हैं या संसद का गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
फैसला अब सदन के भीतर होना जरूरी
अमित शाह का बयान एक राजनीतिक संदेश के साथ-साथ विपक्ष के लिए सीधी चुनौती भी है। अगर सरकार वास्तव में हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, तो चर्चा का रास्ता खुलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहतर होगा।
आखिर संसद की ताकत नारेबाजी में नहीं, सवाल पूछने और जवाब लेने की प्रक्रिया में है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष चर्चा स्वीकार करता है या संसद का हंगामा जारी रहता है।
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