प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वाराणसी से वडनगर जा रहे सेवा यात्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के सामाजिक सुधार के विचार, सेवा के महत्व और युवाओं की भूमिका पर बात की। प्रधानमंत्री ने प्रयागराज कुंभ के सफाईकर्मियों के पैर धोने के पीछे की वजह भी बताई।
- वाराणसी से वडनगर जा रहे युवाओं से संवाद
- ‘सेवा करने वालों का सम्मान होना चाहिए’
- PM मोदी ने बताया- क्यों धोए थे सफाईकर्मियों के पैर
- ‘वडनगर ने संस्कार दिए, काशी ने सेवा के रंग भरे’
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सात सूत्रों का जिक्र
- पहले वडनगर से निकले सेवा यात्रियों से भी की थी बात
- युवाओं को बताया विकसित भारत का अहम हिस्सा
वाराणसी से वडनगर जा रहे युवाओं से संवाद
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वाराणसी और वडनगर के बीच युवा सेवा यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। यात्रा में शामिल युवा रास्ते में गांवों और शहरों में लोगों से संवाद करने के साथ स्वच्छता अभियान, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य स्थानों पर सेवा गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
आकाशवाणी के मुताबिक, यह अभियान 17 सितंबर से शुरू हुआ है और यात्रा 7 अक्टूबर तक चलने वाली है। इसका उद्देश्य युवाओं की भागीदारी के साथ सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को जमीनी स्तर तक ले जाना है।
‘सेवा करने वालों का सम्मान होना चाहिए’
प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के दौरान कहा कि महात्मा गांधी सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेता नहीं थे, बल्कि सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में मौजूद बुराइयों के खिलाफ लगातार काम किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उनके मुताबिक, जो लोग सेवा करते हैं, उनकी सेवा का सम्मान भी होना चाहिए।
PM मोदी ने बताया- क्यों धोए थे सफाईकर्मियों के पैर
प्रयागराज कुंभ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने सफाईकर्मियों की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान सफाई का काम करने वाले लोगों के प्रयासों से आयोजन की स्वच्छता को लेकर पहचान बनी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी भावना के कारण उन्होंने सफाईकर्मियों के पैर धोकर उनका सम्मान करने और उनका आशीर्वाद लेने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने काम के जरिए देश का सम्मान बढ़ाने में योगदान दिया।
‘वडनगर ने संस्कार दिए, काशी ने सेवा के रंग भरे’
प्रधानमंत्री मोदी ने वडनगर और काशी से अपने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वडनगर ने उन्हें जीवन के संस्कार दिए, जबकि काशी ने उन संस्कारों में सेवा के अनेक रंग भरे।
उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि उनकी यात्रा में देशभक्ति, सेवा, संस्कार और संकल्प की भावना दिखाई देती है। उन्होंने युवाओं की इस यात्रा को सेवा की भावना से जोड़ते हुए विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सात सूत्रों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘चरैवति-चरैवति-चरैवति’ के संदेश को लगातार आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा से जोड़ा।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, सेवा के रास्ते पर निरंतर चलते रहना ही इस यात्रा की भावना है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय से जुड़े सात सूत्रों का भी उल्लेख किया—सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद।
पहले वडनगर से निकले सेवा यात्रियों से भी की थी बात
प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे एक दिन पहले उन्होंने वडनगर से वाराणसी की ओर निकले सेवा यात्रियों से भी संवाद किया था। अब उन्होंने काशी से वडनगर की ओर जा रहे दल से बात की।
इस यात्रा में शामिल युवा रास्ते में अलग-अलग गांवों और कस्बों से गुजर रहे हैं। अभियान के दौरान स्वच्छता अभियान और स्थानीय लोगों के साथ संवाद जैसी गतिविधियां भी की जा रही हैं।
युवाओं को बताया विकसित भारत का अहम हिस्सा
प्रधानमंत्री ने युवाओं की भूमिका को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश के भविष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सेवा यात्रियों से यात्रा के दौरान मिलने वाले अनुभवों और लोगों से संवाद को महत्व देने की बात कही।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वाराणसी-वडनगर की दोनों दिशाओं में चल रही यात्राओं में कई राज्यों, जिलों और गांवों को जोड़ा गया है। अभियान के तहत सेवा गतिविधियों के जरिए युवाओं को स्थानीय समुदायों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेवा यात्रियों से संवाद मुख्य रूप से सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और युवाओं की भागीदारी पर केंद्रित रहा। इस दौरान उन्होंने प्रयागराज कुंभ के सफाईकर्मियों के योगदान को याद करते हुए उनके पैर धोकर सम्मान करने की वजह बताई। साथ ही उन्होंने युवाओं को सेवा और सामाजिक जुड़ाव के अनुभवों को समझने का संदेश दिया।
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