बिहार में महागठबंधन का सीट बंटवारा: कांग्रेस की ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ सीटों का दांव
बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो चली है और विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर जारी है। इस बीच, कांग्रेस की ओर से ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ सीटों के बंटवारे में संतुलन की मांग ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने स्पष्ट किया कि हर राज्य में सीटों का अपना समीकरण होता है, जहां कुछ सीटें ‘अच्छी’ और कुछ ‘बुरी’ होती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक पार्टी को सारी ‘अच्छी’ सीटें मिल जाएं और बाकी को ‘बुरी’ सीटें, ऐसा नहीं होना चाहिए। सीटों के बंटवारे में दोनों तरह की सीटों का उचित संतुलन आवश्यक है।
पिछला प्रदर्शन और वर्तमान उम्मीदें
यह याद रखना प्रासंगिक होगा कि 2020 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 पर ही जीत हासिल कर पाई थी। इससे पहले, 2015 के चुनावों में पार्टी ने 41 सीटों पर ताल ठोकी थी और 27 सीटें जीती थीं। उस समय, राजद सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार बनाने में विफल रही थी, जिसका एक कारण कांग्रेस का निराशाजनक प्रदर्शन भी माना गया था। 2020 में, राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़कर 75 सीटें जीती थीं। अब, कांग्रेस ने एक बार फिर तेजस्वी यादव से 70 सीटों की मांग की है। पार्टी का विश्वास है कि वे कम से कम 27 सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं और बाकी पर भी कड़ा मुकाबला दे सकते हैं।
‘अच्छी’ सीटें: जीत और नजदीकी मुकाबले का दांव
कांग्रेस जिन सीटों को ‘अच्छी’ श्रेणी में रखती है, वे वे सीटें हैं जहां पार्टी ने 2020 के चुनावों में या तो जीत दर्ज की थी या फिर बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, “हमारा दावा उन सभी 19 सीटों पर होगा जहां कांग्रेस ने 2020 में जीत हासिल की थी। इसके अलावा, उन सीटों पर भी हमारा जोर रहेगा जहां हमारे उम्मीदवार लगभग 5,000 वोटों के अंतर से हारे थे।” राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से पूरे बिहार में इंडिया ब्लॉक के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, और इसी जोश के साथ कांग्रेस सहयोगियों के साथ मिलकर इन सीटों को जीतने का भरोसा रखती है।
संतुलित बंटवारा: साझा जीत की रणनीति
नेता ने आगे स्पष्ट किया कि सीटों का बंटवारा इस तरह से नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस को केवल वही सीटें मिलें जहां राजद और उसके सहयोगी दल पिछले चुनावों में हार गए थे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एक ही पार्टी को वे सभी सीटें न मिलें जहां सामाजिक समीकरण महागठबंधन के पक्ष में हों।
विस्तारित गठबंधन: आठ दलों की शक्ति
इस बार के बिहार चुनाव में इंडिया ब्लॉक में कुल आठ दल शामिल होंगे। मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), जो पिछले चुनाव में एनडीए का हिस्सा थी, अब इंडिया ब्लॉक के साथ है और बिहार में अगली सरकार बनने पर उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) और हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के भी इस गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद है। बिहार में इंडिया ब्लॉक में वर्तमान में राजद, कांग्रेस, भाकपा (माले), वीआईपी, भाकपा और माकपा प्रमुख दल हैं।
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