नाग पंचमी 2026: कालसर्प दोष से मुक्ति का महासंयोग, जानें नाग देवता को प्रसन्न करने की अचूक पूजा विधि

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Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर कैसे पाएं दोष से मुक्ति, जानें Nag Panchami 2026 की पूजा विधि

आस्था और परंपरा का संगम: नागपंचमी 2024

सावन की रिमझिम फुहारों के बीच हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व ‘नागपंचमी’ दस्तक दे रहा है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को समर्पित यह दिन न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि नाग देवताओं के प्रति हमारे अटूट विश्वास को भी दर्शाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से नाग पूजन करने पर सर्पदंश के भय, कालसर्प दोष और जीवन की अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। भक्त नाग देवता को दूध और अभिषेक अर्पित कर घर-परिवार के लिए सुख-समृद्धि और सुरक्षा का वरदान मांगते हैं। आइए, जानते हैं इस शुभ दिन की तिथि, मुहूर्त और पूजा से जुड़ी हर विशेष जानकारी…

शुभ तिथि और पूजन मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, पंचमी तिथि का आगाज 16 अगस्त की शाम 04:51 बजे से होगा, जो 17 अगस्त की शाम 05:00 बजे तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि के नियम का पालन करते हुए नागपंचमी का मुख्य पर्व आज यानी 17 अगस्त को ही मनाया जा रहा है। आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूजा का सबसे उत्तम और फलदायी समय सुबह 06:15 मिनट से लेकर 08:31 मिनट तक रहने वाला है।

नाग पूजन का पौराणिक महत्व
नागों का देवतुल्य स्थान पौराणिक काल से ही रहा है। महादेव के गले का हार ‘वासुकी’ हों या भगवान विष्णु की शैया बने ‘शेषनाग’, नागों का संबंध सृष्टि के रचयिताओं से सीधा है। याद कीजिए द्वापर युग का वह अलौकिक दृश्य, जब नन्हे कृष्ण को यमुना पार कराने के लिए शेषनाग ने छत्र बनकर उनकी रक्षा की थी, या फिर समुद्र मंथन की वह ऐतिहासिक घटना जिसमें वासुकी नाग ने मंदराचल पर्वत की रस्सी बनकर अहम भूमिका निभाई थी। यह पर्व इन्हीं दिव्य नाग देवताओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का अवसर है।

कैसे करें विधि-विधान से पूजन?
इस विशेष दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के साथ करें और सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। पूजा के लिए पारंपरिक रूप से गाय के गोबर से नाग देवता की आकृति बनाएं और उनका आह्वान करें। यदि आप उपवास रखना चाहते हैं, तो श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें। इसके बाद नाग देवता को गुलाल, अबीर, मेहंदी, सूखे मेवे, पुष्प और दूध अर्पित करें। पूजन के दौरान नाग मंत्रों का जाप करें और पूरी श्रद्धा के साथ अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।


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