मणिपुर के जंगलों से नशीली काली छाया का सफाया: सुरक्षा बलों ने 18 एकड़ अफीम की खेती नष्ट की
मणिपुर के शांत कहे जाने वाले चुराचांदपुर और तेंगनौपाल जिलों के हरे-भरे परिदृश्य पर अफीम की अवैध खेती के काले बादल छाए हुए थे, लेकिन अब सुरक्षा बलों के तेज़ एक्शन ने इन बादलों को चीर दिया है। शनिवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इन दो जिलों में फैले करीब 18 एकड़ के इलाके से अफीम की अवैध खेती का सफाया कर दिया है।
यह बड़ी कार्यवाही शुक्रवार को तब अंजाम दी गई जब जिला पुलिस, असम राइफल्स, वन विभाग और मादक पदार्थ एवं सीमा मामलों (एनएबी) की एक संयुक्त टीम ने चुराचांदपुर के सांगईकोट पुलिस थाना क्षेत्र के डी. लहंगजोल गांव में एक सुनियोजित अभियान चलाया। इस सघन अभियान के परिणामस्वरूप, लगभग 18 एकड़ भूमि पर फैले अफीम के पौधों को जड़ से उखाड़ फेंका गया। अनुमान है कि इस नष्ट की गई खेती से करीब 40 किलोग्राम अफीम की पैदावार होती।
इतना ही नहीं, सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी। उन्होंने तेंगनौपाल जिला प्रशासन और माची वन प्रभाग के साथ मिलकर माची पर्वत श्रृंखला में भी अपनी पैनी नज़र रखी। शुक्रवार को ही, इसी क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ अफीम की खेती को भी सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया।
यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार ने अफीम की खेती में लिप्त लोगों के खिलाफ पहले ही कड़ी चेतावनी जारी की थी। अफीम की खेती न केवल अवैध है, बल्कि यह पहाड़ी क्षेत्रों की बहुमूल्य वनस्पति को भी नष्ट कर रही है और इन नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। सुरक्षा बलों की यह सराहनीय पहल मणिपुर को नशीले पदार्थों के जाल से मुक्त कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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