उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच बहुजन समाज पार्टी ने संगठन के भीतर सख्ती बढ़ा दी है। मायावती ने अपनी सरकार में मंत्री रहे अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे पहले भी पार्टी में कई बड़े चेहरों पर कार्रवाई हो चुकी है।
मायावती ने लिया बड़ा फैसला
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से बाहर करने का ऐलान किया है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया गया है।
अंटू मिश्रा मायावती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और बसपा के प्रमुख नेताओं में उनका नाम शामिल रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले उनका निष्कासन पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर मायावती के सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप
मायावती ने अपने बयान में अंटू मिश्रा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, उन्होंने यह विस्तार से नहीं बताया कि ऐसी कौन-सी गतिविधियां थीं, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
बसपा की राजनीति में संगठनात्मक अनुशासन को हमेशा महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। चुनावी माहौल गर्म होने के बीच मायावती अब पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर जोर देती दिखाई दे रही हैं।
पहले अशोक सिद्धार्थ पर हुई थी कार्रवाई
अंटू मिश्रा पर कार्रवाई से कुछ समय पहले मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से निष्कासित किया था।
लगातार बड़े नेताओं पर कार्रवाई को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना मायावती की प्राथमिकता नजर आ रही है।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को किया अलर्ट
बसपा प्रमुख ने अपने संदेश में कार्यकर्ताओं को चुनावी माहौल को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गरमाने के साथ विरोधी दल कई तरह के राजनीतिक हथकंडे अपना सकते हैं।
मायावती ने कार्यकर्ताओं से ‘साम, दाम, दंड, भेद’ जैसे हथकंडों से सावधान रहने और पूरी ईमानदारी तथा निष्ठा के साथ पार्टी के मिशन में जुटने को कहा।
अंबेडकरवादी मिशन पर जोर
मायावती ने आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा के अंबेडकरवादी मिशन को सफल बनाने का आह्वान किया। उनका संदेश साफ है कि चुनाव से पहले पार्टी संगठन को किसी भी तरह की अंदरूनी कमजोरी से बचाना होगा।
बसपा के लिए 2027 का चुनाव खास महत्व रखता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
2027 से पहले सख्त संगठनात्मक रणनीति
अंटू मिश्रा जैसे पुराने और प्रभावशाली नेता का निष्कासन बसपा के भीतर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। इससे यह संकेत मिलता है कि मायावती चुनाव से पहले पार्टी में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
अब देखना होगा कि लगातार हो रही संगठनात्मक कार्रवाइयां बसपा को 2027 के चुनाव में कितना मजबूत करती हैं। मायावती के लिए चुनौती सिर्फ विरोधियों से मुकाबला करने की नहीं, बल्कि अपने संगठन को पूरी तरह एकजुट और सक्रिय रखने की भी है।
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