भोपाल। एक बड़ी सियासी और प्रशासनिक हलचल के बीच सीएम मोहन यादव की दावोस यात्रा से ठीक पहले मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार देर शाम प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल कर दिया है। प्रदेश के 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर प्रशासनिक चक्र को चुस्त-दुरुस्त करने का संकेत दे दिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरे पर रवाना होने से कुछ ही घंटे पहले जारी की गई इस तबादला सूची को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि यह कवायद केवल अफसरों की इधर-उधरी नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और आगामी बजट सत्र की तैयारियों की एक बड़ी झलक है। सरकार का उद्देश्य प्रमुख विभागों में कार्यकुशलता, समन्वय और जवाबदेही को नई ऊंचाई पर ले जाना है।
बड़े फेरबदल की बारीकियां
तबादलों में कई अहम नाम शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारियों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं:
- राजस्व मंडल की कमान शिवशेखर शुक्ला को: 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिवशेखर शुक्ला को एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन, धार्मिक न्यास, धर्मस्व और गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर अध्यक्ष, राजस्व मंडल (मध्य प्रदेश) नियुक्त किया गया है। राजस्व मंडल राज्य के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ मानी जाती है, जहां भूमि और राजस्व से जुड़े अंतिम निर्णय होते हैं।
- उमाकांत उमराव के प्रभार में कटौती: 1996 बैच के आईएएस उमाकांत उमराव से प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग और प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। अब उन्हें केवल प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे इस क्षेत्र में सरकार की योजनाओं को गति देना लक्ष्य है।
- ऊर्जा विभाग में पुनर्संतुलन: 2008 बैच के आईएएस विशेष गडपाले को सचिव, ऊर्जा विभाग और प्रबंध संचालक, एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, जबलपुर की कमान सौंपी गई है। ऊर्जा मांग और प्रबंधन में सुधार के मद्देनज़र यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है।
- आदिवासी विकास पर फोकस: 2010 बैच के आईएएस तरुण राठी को आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल से हटाकर आयुक्त, आदिवासी विकास, भोपाल नियुक्त किया गया है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परफॉर्मेंस को मिली वरीयता
प्रशासनिक गलियारों में इस तबादला सूची को ‘परफॉर्मेंस-बेस्ड गवर्नेंस’ का बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में योजनाओं की जमीनी प्रगति, निवेश और जनकल्याण के मामलों में तेजी लाने के लिए यह फेरबदल अहम माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह केवल शुरुआत है, बल्कि आने वाले समय में (खासकर बजट सत्र और लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र) और भी विभागों में फेरबदल संभव हैं।
क्या है सरकार का मूड?
मोहन यादव सरकार का मूड अब साफ है—प्रशासनिक पकड़ को और मजबूत करना और नीतिगत फैसलों को तेज़ी से लागू करना। दावोस यात्रा से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय आने वाले महीनों में प्रदेश की प्रशासनिक दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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