आबूरोड में शांति, एकता और विश्वास की अलख जगाने महासम्मेलन, राज्यपाल ने किया शुभारंभ
आबूरोड, राजस्थान: ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मीडिया विंग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन का भव्य शुभारंभ राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने किया। यह चार दिवसीय आयोजन, जिसमें देशभर से 1500 से अधिक पत्रकार, संपादक और संवाददाता प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, रेडियो और वेब मीडिया से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, शांति, एकता और विश्वास जैसे गहन विषयों पर विमर्श का साक्षी बनेगा।
लोकतंत्र के प्रहरी मीडिया की अहमियत पर राज्यपाल का जोर
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने उद्घाटन भाषण में मीडिया को लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ बताया। उन्होंने कहा, “समाज में शांति, एकता और विश्वास को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मीडिया लोकतंत्र की जड़ों को सींचकर उसे सदा हरा-भरा रखने का कार्य करता है। भारत के लोगों के रक्त में ही लोकतंत्र समाहित है।” उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उस समय भी नगर पंचायतों में सदस्य चुने जाते थे, जिसका उल्लेख उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक ‘भारत एक खोज’ में पढ़ा था। राज्यपाल ने इस बात पर बल दिया कि यदि चुनाव जातिगत आधार के बजाय विचार और देशहित के आधार पर लड़े जाएं, तो लोकतंत्र और भी मजबूत होगा, और इस दिशा में मीडिया को अपनी लेखनी केंद्रित करनी चाहिए।
आध्यात्मिक विश्वविद्यालय ब्रह्माकुमारीज़ का राष्ट्र निर्माण में योगदान
राज्यपाल बागड़े ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान को एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय बताते हुए कहा कि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान का प्रसार कर रहा है। उन्होंने संस्थान के नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और अंधविश्वासों को दूर करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की और कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्कृति को बचाने में महती भूमिका निभा रही है।
शांति, पत्रकारों का स्वधर्म बने: मोहिनी दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य केवल अपनी संस्था का प्रचार करना नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि पत्रकारों के मन को शांति मिले। आज के समय में हिंसा और स्वार्थ बढ़ रहा है। होनी तो ‘पीस’ (शांति) चाहिए, पर अब सब ‘पीसेस’ (टुकड़े) हो रहे हैं।” उन्होंने पत्रकारों को शांति, ज्ञान और सुख प्रदान करने की अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा, “शांति हम सबका स्वधर्म है। शांति के सागर हमारे पिता हैं। हमें इसका अभ्यास करना है, यह हमारा स्वभाव बन जाएगा।”
मीडिया: देश के इतिहास का दैनिक लेखक – प्रोफेसर संजय द्विवेदी
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के जनसंचार विभागाध्यक्ष, प्रो. संजय द्विवेदी ने पत्रकारों को देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का वाहक बताया। उन्होंने कहा, “मीडिया ही देश का दैनिक इतिहास लिख रहा है। भारत को देखने की आंखें पत्रकार ही हैं।” उन्होंने इस महासम्मेलन को जनसंवाद से जुड़े लोगों को मिलाकर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। डिजिटल युग की चुनौतियों का जिक्र करते हुए, प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आज सामान्य व्यक्ति को भी अभिव्यक्ति का मंच मिला हुआ है, जो एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि नकारात्मकता, नफरत, फेक न्यूज़ और ट्रोलिंग के इस दौर में पत्रकारों का कंटेंट रचनात्मक होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “हमें कंटेंट क्रिएटर के साथ-साथ कंटेंट रिफार्मर भी बनना है।”
ब्रह्माकुमारीज़ के शांति संदेश को विश्व पटल पर फैलाएं: प्रो. डॉ. मानसिंह परमार
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति, प्रो. डॉ. मानसिंह परमार ने आज के विश्व की शांति की महती आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आज विश्व को शांति की जरूरत है, शांति से एकता होती है और विश्वास जन्म लेता है।” उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं और प्रयासों को विश्वभर में फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ मीडिया विंग के अध्यक्ष बीके करुणा भाई, मीडिया विंग की उपाध्यक्ष बीके सरला दीदी, मीडिया विंग के राष्ट्रीय संयोजक बीके शांतनु भाई, राष्ट्रपति पदक प्राप्त ज्योतिषी और लाइफ कोच डॉ. सोहिनी शास्त्री, तथा पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अजित पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जयपुर की जोनल कोऑर्डिनेटर बीके चन्द्रकला दीदी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
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