यहां दिया गया लेख एक नए, आकर्षक और रोचक रूप में प्रस्तुत है, जिसमें मूल सामग्री और लंबाई को पूरी तरह बरकरार रखा गया है:
India
oi-Divyansh Rastogi
Updated: Wednesday, January 21, 2026, 18:50 [IST]
Manoj Tiwari MP Report Card: जनता के बीच दूरी, कामकाज में पिछड़ाव!
18वीं लोकसभा के गठन को डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन कई सांसद अपने क्षेत्र की जनता के बीच नदारद नजर आ रहे हैं। जहां विपक्षी सांसदों के खिलाफ ‘सांसद जी गायब’ के पोस्टर चस्पा हो रहे हैं, वहीं NDA गठबंधन के कुछ सांसद भी विकास कार्यों की रेस में काफी पीछे छूटते दिखाई दे रहे हैं। इस लिस्ट में उत्तर-पूर्वी दिल्ली से हैट्रिक लगाने वाले बीजेपी सांसद मनोज तिवारी का नाम भी शामिल हो गया है।
आंकड़े बयां कर रहे हैं कि MPLADS फंड का इस्तेमाल कैसे हो रहा है। 2024 से अब तक मनोज तिवारी को जहां 9.80 करोड़ रुपये आवंटित हुए, वहीं इसमें से महज 2.39 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। 15 में से सिर्फ 1 प्रस्तावित काम पूरा हो सका है। क्या यह फंड का सही उपयोग है? Oneindia की जांच में MPLADS डेटा से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आइए, आंकड़ों, तुलना, फैक्ट्स और टाइमलाइन के साथ मनोज तिवारी की सांसदी का रिपोर्ट कार्ड समझते हैं…
Who Is Manoj Tiwari: भोजपुरी सुपरस्टार से सांसद तक का चमकता सफर
मनोज तिवारी भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता होने के साथ-साथ भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार, गायक और अभिनेता भी हैं। भोजपुरी फिल्मों से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने 2009 में राजनीति में कदम रखा। 2014 में उन्होंने पहली बार भाजपा के टिकट पर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीट जीती। 2019 में उन्होंने दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराकर ‘जायंट-स्लेयर’ की उपाधि पाई। 2024 में भी उन्होंने हैट्रिक लगाकर अपनी जीत का परचम लहराया। मनोज तिवारी की कुल संपत्ति करीब 32 करोड़ रुपये है, जबकि देनदारियां 2 करोड़ रुपये से अधिक हैं। उनकी आय के मुख्य स्रोतों में गायन, अभिनय और सांसद वेतन शामिल हैं।
Manoj Tiwari Marriage: दो शादी और तीन बेटियां, कौन हैं उनकी पत्नी?
मनोज तिवारी की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही है। उन्होंने दो शादियां की हैं। उनकी पहली शादी 1999 में रानी तिवारी से हुई, जिनसे उनकी बड़ी बेटी रिती तिवारी हैं। यह रिश्ता 2012 में तलाक के साथ खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने 2020 में सुरभि तिवारी से दूसरी शादी की। इस रिश्ते से उनकी दो बेटियां हैं, जिनका जन्म क्रमशः 30 दिसंबर 2020 और 12 दिसंबर 2022 को हुआ। इस तरह मनोज तिवारी तीन बेटियों के पिता हैं। बताया जाता है कि दूसरी शादी से पहले उन्होंने अपनी बड़ी बेटी से इजाजत ली थी। सुरभि पहले उनके काम में साथ देती थीं, जिसके बाद दोनों के रिश्ते ने नया मोड़ लिया।
紧張感 का पर्दा: MPLADS रिपोर्ट कार्ड
MPLADS (मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम) के तहत हर सांसद को सालाना करोड़ों रुपये मिलते हैं। इस फंड का उद्देश्य सड़क, स्कूल, अस्पताल, जलापूर्ति और स्वच्छता जैसे विकास कार्यों को गति देना है। 2024 से मनोज तिवारी को 9.80 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं, लेकिन MPLADS पोर्टल के अनुसार तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है:
- कुल आवंटित बजट: 9.80 करोड़ रुपये
- कुल खर्च: सिर्फ 2.39 करोड़ रुपये
- प्रस्तावित काम: 15
- पूरे हुए काम: महज 1
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में विकास की मांग को देखते हुए यह आंकड़ा काफी चिंताजनक है। क्षेत्र में सड़कें, अस्पतालों का अपग्रेडेशन और स्वच्छता की बुनियादी जरूरतें अभी भी पूरी होना बाकी हैं। MPLADS पोर्टल पर डेटा तो पारदर्शिता के लिए अपलोड होता है, लेकिन इतने कम खर्च ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तक कि 18वीं लोकसभा में कुल MPLADS उपयोग दर महज 1.82% है, और कई सांसदों ने तो अभी तक शून्य खर्च किया है।
जनता का सवाल: फंड कहां गया और सांसदी पर खतरा?
मनोज तिवारी की सांसदी का रिपोर्ट कार्ड एक मिश्रित तस्वीर पेश करता है। राजनीतिक लोकप्रियता और भोजपुरी स्टारडम तो है, लेकिन MPLADS में कम खर्च विकास के मोर्चे पर गंभीर सवाल पैदा करता है। क्या यह देरी जिला प्रशासन की है या सांसद की अनुपस्थिति का नतीजा? क्या फंड का सही उपयोग नहीं हो पा रहा? नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली की जनता पूछ रही है कि बाकी बचे 7.41 करोड़ रुपये आखिर कहां हैं?
क्षेत्र में सड़कें, अस्पताल, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की मांग तेज है। 2026 के चुनाव में यह रिपोर्ट कार्ड बीजेपी और मनोज तिवारी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। मनोज तिवारी अपने भाषणों और भोजपुरी गानों में भले ही टॉप पर हों, लेकिन MPLADS में यह पिछड़ाव उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना यह है कि क्या वे आने वाले समय में फंड उपयोग बढ़ाएंगे?
यहां यह जानना जरूरी है कि MPLADS योजना 1993 से चल रही है। इसमें सांसद प्रोजेक्ट सुझाते हैं, और जिला प्रशासन उसे मंजूरी देकर कार्यान्वयन करता है। यह फंड नॉन-लैप्सेबल है यानी बचा हुआ पैसा अगले साल ट्रांसफर हो जाता है। SC/ST क्षेत्रों में इसका विशेष प्रतिशत अनिवार्य है। यदि फंड का दुरुपयोग होता है, तो जांच और सजा का भी प्रावधान है। मनोज तिवारी का यह रिपोर्ट कार्ड अब जनता के लिए विकास का एक अहम पैमाना बन गया है।
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English summary
Manoj Tiwari MP Report Card: North East Delhi BJP Sansad MPLADS Spending Analysis Pass or Fail News Hindi
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