राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोरने वाली करूर भगदड़: सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को सौंपा मामला

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करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने सौंपी CBI को जांच, गठित की तीन-सदस्यीय पर्यवेक्षी समिति

नई दिल्ली: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। कोर्ट ने इस दुखद घटना के गंभीर परिणामों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर इसके दूरगामी प्रभाव को देखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

न्याय की मांग और राष्ट्रीय अंतरात्मा का जागरण:

फैसला सुनाते हुए, न्यायमूर्ति जे माहेश्वरी ने इस त्रासदी को “राष्ट्रीय अंतरात्मा को झकझोर देने वाला” बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे गंभीर मामले की गहन जांच अत्यंत आवश्यक है ताकि सभी संबंधित पक्षों की चिंताओं को दूर किया जा सके और सच्चाई सामने आ सके।

निगरानी और समीक्षा के लिए सशक्त समिति:

कोर्ट ने सीबीआई की जांच की निगरानी और समीक्षा के लिए एक तीन-सदस्यीय पर्यवेक्षी समिति का भी गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी करेंगे। उनके साथ दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल होंगे, जो तमिलनाडु कैडर के होंगे, लेकिन वे तमिलनाडु के मूल निवासी नहीं होंगे। यह समिति न केवल सीबीआई की जांच की निगरानी करेगी, बल्कि भगदड़ से संबंधित किसी भी अन्य मामले की जांच करने का अधिकार भी रखती है।

मौलिक अधिकारों का संरक्षण और पारदर्शी जांच:

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है, और इसीलिए सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए हैं। पीठ ने कहा, “तथ्यों को देखते हुए, यह मुद्दा नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। निर्देश हैं कि जांच सीबीआई को सौंपी जाए। पक्षों की चिंताओं को दूर करने के लिए, हम एक तीन सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखते हैं।”

नियमित रिपोर्टिंग और न्याय प्रक्रिया का पालन:

कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया है कि सीबीआई को अपनी जांच की मासिक रिपोर्ट गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। इसके अतिरिक्त, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी खंडपीठ को सौंपी जाएगी। समिति सीबीआई की जांच की निगरानी करेगी और न्यायाधीश के निर्देशों के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली तय करेगी। किसी भी स्तर पर यदि आवश्यकता महसूस होती है, तो अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता होगी।

यह फैसला न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पीड़ितों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने की दिशा में एक मजबूत संकेत देता है।


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