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अमरावती नगर निगम चुनाव: टूटे गठबंधन में ‘विश्वासघात’ के आरोप, भाजपा उम्मीदवारों ने नवनीत राणा पर साधा निशाना
अमरावती: चुनावी रण में मिली करारी हार के बाद अमरावती की सियासत गरमा गई है। यहां के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर बवाल मचा दिया है। हारे हुए और जीते हुए 22 भाजपा उम्मीदवारों ने अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शिकायत की है और पार्टी की स्थानीय नेता व पूर्व सांसद नवनीत राणा को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
उम्मीदवारों ने अपनी हार का ठीकरा नवनीत राणा के सिर फोड़ा है। उनका आरोप है कि राणा ने न केवल पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर खुलेआम भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार किया, बल्कि उन्हें "बेवकूफ" करार देते हुए अपनी पार्टी युवा स्वाभिमान (वाईएसपी) को "असली भाजपा" बताया। इस आरोप ने गठबंधन टूटने के बाद पार्टी के भीतर पैदा हुई दरार को और गहरा कर दिया है।
करारी हार और बदला समीकरण
15 जनवरी को हुए अमरावती नगर निगम (एएमसी) चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले बेहद निराशाजनक रहा। 87 सदस्यीय निगम में भाजपा को पिछली बार मिली 45 सीटों के मुकाबले इस बार महज 25 सीटें ही मिलीं। दूसरी ओर, नवनीत राणा के पति विधायक रवि राणा के नेतृत्व वाली युवा स्वाभिमान पार्टी (वाईएसपी) का प्रदर्शन जबरदस्त रहा। पिछली बार 3 सीटों पर सिमटी वाईएसपी इस बार 15 सीटें जीतकर बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
नतीजों ने भाजपा और वाईएसपी के बीच के रिश्तों की पोल खोल दी है। चुनाव से पहले दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था, लेकिन भाजपा के एक स्थानीय नेता ने यह दावा किया था कि नवनीत राणा का पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन रहेगा, जो हवा-हवाई साबित हुआ।
उम्मीदवारों का गुस्सा और मांग
22 उम्मीदवारों में से 20 हारे हुए और 2 जीते हुए हैं, लेकिन सभी एकजुट होकर नवनीत राणा के खिलाफ खड़े हैं। सीएम फडणवीस को लिखे पत्र में उन्होंने साफ कहा है, "हमारी हार विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि वरिष्ठ भाजपा नेता नवनीत राणा के हमारे ही खिलाफ प्रचार करने की वजह से हुई है।"
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नवनीत राणा को पार्टी में बरकरार रखा गया, तो अमरावती में भाजपा की पकड़ और कमजोर हो जाएगी। ऐसे में उनका तत्काल निष्कासन जरूरी है।
राणा की चुप्पी और पार्टी की मुसीबत
इस पूरे विवाद पर नवनीत राणा की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे सियासी सस्पेंस बरकरार है। यह पूरा मामला विदर्भ क्षेत्र में भाजपा के भीतर बढ़ती गहरी दरारों को उजागर करता है। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिन्हें अब पार्टी के भीतर इस बगावत को शांत करने और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने का दबाव है।
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