पंजाब: विपक्षी दलों का आरोप, “AAP सरकार प्रेस की आवाज दबाने में जुटी”
पंजाब में सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य की ताकत का इस्तेमाल करके प्रेस को दबाया जा रहा है। यह बवाल पंजाब केसरी समाचार पत्र समूह के दावों के बाद शुरू हुआ है। समूह का कहना है कि जब उसने AAP के राष्ट्रीय संयोजक के खिलाफ विपक्ष के आरोपों पर एक संतुलित रिपोर्ट प्रकाशित की, तो उसके बाद प्रवर्तन अधिकारियों ने उस पर कई छापे मारे।
प्रताप सिंह बाजवा का हमला
पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सत्तारूढ़ AAP पर मीडिया को चुप कराने की कोशिश का आरोप लगाया है। बाजवा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि प्रेस को कुचलने के लिए राज्य शक्ति का उपयोग करने का एक स्पष्ट पैटर्न दिख रहा है। उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर और विज्ञापन नाकाबंदी को सबूत के तौर पर पेश किया। बाजवा ने पंजाब केसरी के साथ एकजुटता व्यक्त की और वाल्टर क्रोंकाइट का हवाला देते हुए लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया।
BJP और SAD का विरोध
BJP प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी मीडिया की स्वतंत्रता पर कथित हमलों की निंदा की है। उन्होंने घोषणा की कि 17 जनवरी को एक BJP प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्यपाल से मिलेगा। जाखड़ ने AAP सरकार पर स्वतंत्र मीडिया आवाजों को दबाने की इच्छा रखने का आरोप लगाया और पंजाब को पुलिस राज्य में बदलने के खिलाफ चेतावनी दी।
दूसरी ओर, SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी न्यूज ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकारें खतरा महसूस करती हैं, तो वे स्वतंत्र मीडिया और विपक्ष को निशाना बनाती हैं। बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्रवाइयों की तुलना इंदिरा गांधी के आपातकाल से की और चेतावनी दी कि यह रणनीति अंततः विफल होगी।
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और हरियाणा सीएम की प्रतिक्रिया
पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने स्थिति को निंदनीय बताया और राज्यपाल व मुख्यमंत्री दोनों से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पंजाब केसरी जैसे प्रमुख मीडिया संस्थान के साथ ऐसा सुलूक हो सकता है, तो आम नागरिकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी AAP सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को सत्ता खोने का डर है, इसलिए वह मीडिया को डरा और दबा रही है। सैनी ने दावा किया कि सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ रहा है, जिसकी वजह से ऐसी कार्रवाइयां हो रही हैं।
सरकार का पक्ष
वहीं, पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा है। हालांकि, विपक्षी नेता इसे राज्य में प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए अपनी चिंता जताना लगातार जारी रखे हुए हैं।
With inputs from PTI
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
