ईरान-इजरायल महाजंग रोकने के लिए पुतिन ने संभाली कमान, सीधी बातचीत से दुनिया को चौंकाया

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ईरान संकट पर पुतिन की पहल.

पश्चिम एशिया के सुलगते हालात के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर ‘शांतिदूत’ की भूमिका में नजर आए हैं. शुक्रवार को पुतिन ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ गहन फोन वार्ता की. क्रेमलिन की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने क्षेत्र में बढ़ते बारूदी तनाव को कम करने के लिए रूस की ओर से मध्यस्थता की बड़ी पेशकश की है. यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है, जब ईरान अपनी सीमाओं के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और भारी असंतोष की आग में झुलस रहा है.

अमेरिका और इजराइल पर साजिश के आरोप

स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं की रिपोर्टें खौफनाक मंजर बयां कर रही हैं—ईरान में विरोध की लहर को कुचलने के लिए की गई कार्रवाई में अब तक हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है. इस आंतरिक अस्थिरता ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है. इजराइल के ढाल बने अमेरिका की ओर से भी सैन्य कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं. पलटवार करते हुए ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल को कटघरे में खड़ा किया है. तेहरान का आरोप है कि ये दोनों देश प्रदर्शनों की आड़ में ईरान को अस्थिर करने की गहरी साजिश रच रहे हैं.

जून का जख्म और रूस-ईरान की बढ़ती नजदीकी

मौजूदा तनाव की जड़ें जून के उस घातक टकराव में छिपी हैं, जब इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए थे. उस वक्त अमेरिका ने भी ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एएफपी को बताया कि इस नाजुक घड़ी में पुतिन तनाव को कम करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान से बातचीत में पुतिन ने रूस-ईरान की ‘रणनीतिक साझेदारी’ को और फौलादी बनाने पर जोर दिया. इसके जवाब में पेजेशकियान ने भी वैश्विक मंच पर रूस के अडिग समर्थन के लिए आभार जताया.

अवेयर मीडिया नेटवर्क

रूस की मध्यस्थता: शांति की उम्मीद या सिर्फ औपचारिकता?

नेतन्याहू के साथ संवाद के दौरान क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि रूस शांति स्थापना के लिए बीच-बचाव करने को तैयार है, हालांकि ठोस कदमों का खाका अभी सामने नहीं आया है. गौर करने वाली बात यह है कि जून के संघर्ष में भी रूस ने ऐसी ही पेशकश की थी. दूसरी तरफ, इजराइली पीएम नेतन्याहू ने हाल ही में ईरान की जनता को ‘तानाशाही से मुक्ति’ मिलने की उम्मीद जताकर आग में घी डालने का काम किया था.

फिलहाल, सख्त दमन और इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद ईरान में प्रदर्शनों की तीव्रता कुछ कम हुई है. एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों ने पर्दे के पीछे से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाया कि वे ईरान पर हमले का कदम न उठाएं, क्योंकि एक भी गलत चिंगारी पूरे क्षेत्र को तबाह कर सकती है.

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